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प्रभु के प्रति सम्पर्णता ही जीवन का आधार

Prabhu ke prti sampran

प्रभु के प्रति सम्पर्णता ही हैं जीवन आधार 


कौन   जान  पाया हैं  रहस्य   तेरा
साकार तू, आकार तू, निराकार तू ।

अता  नहीं तेरा, पता नहीं  तेरा
सर्वत्र व्याप्त, घट घट वासी तू ।

देह  बना कर,  किया  आत्मा  का प्रवास
चालक बनकर, किया सृष्टि का संचालन ।

बुराई की राह  छोड़ , चल  अच्छाई  पर
दीनहीन की सेवा कर, बन प्रभु का दूत ।

तपोभूमि पर कर्तव्य पालन कर हे मानव
भूखे  की  भूख मिटा  दे, प्यासे  की तर ।

कौन   जान  पाया है  रहस्य  तेरा
विधि तू, विधान तू, न्यायधीश तू ।

वो (मानव) कर्म करता चोरी चुपके
तोलता    हैं   तो    तराज़ू      तले ।


फल  की   अभिलाषा   त्याग दो   उस   पर
नित्य प्रति सत्कर्म अर्पण कर हे प्राणी जन ।

जन्म मरण से मुक्ति पा ले, मिला है अवसर
प्रभु के प्रति सम्पर्णता ही है जीवन आधार ।।

✍🏻 एल आर सेजु थोब "प्रिंस"
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