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साल 2019 में भारत ने क्या खोया क्या पाया ? ये हुई सबसे बड़ी क्षति

साल 2019 में भारत ने क्या खोया क्या पाया ? ये हुई सबसे बड़ी क्षति



भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। जिसे उसके ज्ञान विज्ञान एवम् धर्म, अध्यात्म ने ही विश्व गुरु बनाया है। प्रकृति के सतत् विकास क्रम में वर्ष 2019 ने भारत की राजनीति, समाज, इतिहास, भूगोल तथा धार्मिक मान्यताओं आदि को पूरी तरह से बदल दिया है। संक्षेपतः जिसे हम निम्न वत् देख सकते हैं :-

सामाजिक घटनाक्रम :-

14 फरवरी 2019 पुलवामा के आतंकी घटनाक्रम से भारतीय शौर्य के धनी 40 वीर जवानों की वीरगति से काफी आक्रोशपूर्ण रहे। देश के हर धर्म, संस्कृति के लोग एक स्वर से देश की एकता-अखंडता के लिए एकजुट होकर एकता की मिशाल बन गये। जिसकी परिणति 26 फरवरी को सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में हुई। भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक करके देशवासियों के हौंसलों को साकार कर दिया। समूचे विश्व में भारतीय समाज की एकजुटता एवम् नेतृत्व की भूरि भूरि प्रशंसा हुई। समाज को कमजोर करने वाली विघटनकारी शक्तियों को मुंहतोड़ करारा जवाब मिला। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर मोदी के कुशल नेतृत्व में समाज में स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसे पूरे देश ने सहर्ष स्वीकार किया। पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में अपने योगदान की परम्परा का अपेक्षित विकास हुआ। भारतीय समाज के पिछले पायदान पर खड़े बहुसंख्य देशवासियों के कल्याणार्थ विविध विकास योजनाओं को भी क्रियान्वित किया गया।
हॉ, बीच-बीच में कुछ नर पिशाचों द्वारा किए गए मानवता को शर्मसार करने वाले कुत्सित एवम् वीभत्स कृत्यों ने देश की समरसता, एकता तथा भारतीयता को अन्दर तक झकझोर दिया। घर-ऑगन से बाहर निकल कर सड़कों पर आने को मजबूर कर दिया था। धर्मनिष्ठ भारतीय समाज की एकजुटता  को कलंकित किया। विश्व पटल पर भारत की बहुधर्मी संस्कृति को भी शर्मिन्दा होना पड़ा। भारतीय लोकतॉत्रिक न्याय प्रणाली में अति विलम्बित न्याय से लोगों का धैर्य टूटता नजर आया। जिसकी परिणति वर्ष के अंत मे हैदराबाद डॉ प्रियंका रेड्डी कॉण्ड के आरोपित दोषियों के एनकाउन्टर  के रूप में हुई। समाज को अहेतुक प्रसन्नता प्राप्त हुई।

विकास से कोसों दूर दुर्गम एवं अविकसित क्षेत्रों में अवस्थित समाज को केन्द्र सरकार की योजनाओं ने सुगम आवागमन हेतु सड़कों का जाल बिछा दिया। दूर दराज़ के इलाकों में गॉवों को जोड़ते हुए गरीबों को बहुप्रतिक्षित आवास, बिजली, पानी, स्वास्थ्य एवं शिक्षा की सुविधा देकर सरकार ने पिछले पायदान पर खड़े बहुसंख्य देशवासियों के कल्याणार्थ विविध विकास योजनाओं को भी क्रियान्वित करके एक मजबूत आधार दिया है।

इसी 2019 ने बहुसंख्य समाज की धार्मिक अपेक्षाओं को भी पूरा किया है। इतना ही नहीं, भारतीय समाज पर 2019 का बहुत ही गहरा एवं अविश्वसनीय प्रभाव स्वतः दिखाई देता है। देश के राज्यों की कुछ सरकारों द्वारा भी स्वयं के वर्चस्व हित समाज को विघटित करने वाले निर्णय भी लिये गये। जिससे समाज का विकास प्रभावित रहा। वर्ष का समापन भी विपक्ष द्वारा आयोजित प्रदर्शन एवं तोड़ फोड़ से सामाजिक समरसता को तार - तार करते हुए हुआ।

आर्थिक घटनाक्रम :-

समाज के विकास में अर्थ का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार हर बीस वर्ष में मंहगाई स्वतः 10% वृद्धि को प्राप्त हो जाती है। आज के वैश्विक मन्दी के दौर में हमारा देश भी अछूता नहीं है। विश्व के तमाम देशों की आपसी खींचतान एवं अदूरदर्शी निर्णय ने आर्थिक विकास को काफी प्रभावित किया है। लोकतांत्रिक देश होने के कारण आजादी के नाम पर वाम विचार धारा के समर्थकों द्वारा सरकार के हर कार्यों में विरोध प्रदर्शन भी आर्थिक समरसता को प्रभावित करता रहा है। मात्र वर्चस्व की प्राप्ति के लिए जनता को गुमराह करके विरोध प्रदर्शन का घटिया तरीका भी नुकसान देह रहा है। विरोध के नाम पर हिंसा त्मक प्रदर्शन, तोड़ फोड़, सरकारी व जन सम्पत्तियों को क्षति पहुंचा कर देश की विकसित हो रही अर्थ व्यवस्था को नीचे ढकेला गया। G.S.T. व नोट बन्दी से अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। हॉ, कुछ न कुछ सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिला है। अवैध कमाई करने वालों पर अंकुश भी लगा है। सत्ता सीनों के द्वारा किए जा रहे घोटालों पर भी अंकुश लगा है। फिर भी कल कारखानों की बन्दी, श्रमिकों की छॅटनी, बढती बेरोजगारी ने आर्थिक विकास को काफी प्रभावित किया है। इसके लिए मेरे विचार से पूर्व वर्ती सरकारों द्वारा समुचित शैक्षणिक परिवेश न उपलब्ध कराना भी एक कारण है। संस्कारवान शिक्षा का न होना भी आर्थिक विकास को काफी प्रभावित किया है। अपने कर्तव्यों का पूर्ण निर्वहन का पवित्र भाव संस्कारित  शिक्षा से ही प्राप्त हो सकती है। विगत वर्षों में शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट भी आर्थिक मन्दी का परोक्ष सशक्त कारण है ।

राजनीतिक घटनाक्रम :-

वर्ष 2019 में राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में बहुत ही ऐतिहासिक, भौगोलिक, सामाजिक, धार्मिक कार्य दृष्टिगत होते हैं।  वर्ष के प्रारम्भिक दिनों में सर्जिकल स्ट्राइक करके देश की सेना ने अपने विरोधियों को बता दिया कि हम अब किसी से कम नहीं हैं । सर्जिकल स्ट्राइक में देश के जाबाज, अदम्य साहस एवं उत्कट अभिलाषा के धनी 'अभिमान 'को पाकिस्तान सरकार द्वारा ससम्मान वापसी करना भारतीय राजनीति की श्रेष्ठता को स्वतः सिद्ध करती है। विश्व के तमाम शीर्ष  देशों की भारत से मित्रता भी राजनीतिक सफलता सुनिश्चित करती है। संयुक्त राष्ट्र संघ में भी भारतीय राजनीति ने अपना प्रबल पक्ष रख कर वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त किया है। स्वच्छ राजनीति से ही सदियों पुराना राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के विवाद 9 नवम्बर 2019 को बिना किसी हानि के हल हो पाया है। आज तक के सत्ताधीशों ने जानबूझकर ही राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए इस मुद्दे को बनाए रखा था। पारदर्शी राजनीति ने ही बॉंटो- खाओ के तर्ज की राजनीति को थप्पड़ मार कर जम्मू-कश्मीर की समस्या का पटाक्षेप करते हुए अगस्त 2019 में धारा 370 को बिना किसी हानि के समाप्त कर अमन चैन का पथ प्रशस्त किया है।

हॉ, दुखद इतना रहा कि हममें  से कुछ भारतीय जन ,बाहरी विघटन कारी अराजक तत्वों के बहॅकावे में निजी स्वार्थ की पूर्ति में देश के लक्ष्य को भूल कर , विरोधी सुर साध कर देश को क्षति पहुंचाने का घृणित कार्य अंजाम देकर अपनी प्रतिभा एवम् प्रतिष्ठा को शर्मसार करने से नहीं चूकते हैं। यह शुभ संकेत नहीं है। चलते चलते अन्तिम दिनों में राजनीति में भारी गिरावट देखने को मिली । सी ए ए, पी एन आर, एन आर सी जैसे राष्ट्र हित के मुद्दों पर भी विपक्ष ने गैरजिम्मेदारी का निर्वाह किया।

हरिश्चंद्र त्रिपाठी हरीश रायबरेली
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2 टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर, समयपरक व सार्थक आलेख प्रस्तुति जो नि: संदेह वर्ष २०१९ की सामाजिक राजनीतिक और आर्थिक घटनाओं को जानने समझने में सहायक है।

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