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फोबिया (Phobia) क्या है ? सोशल फ़ोबिया को कैसे दूर करे

फोबिया ( Phobia ) क्या है ? सोशल फ़ोबिया को कैसे दूर करे

Phobia kya hai ? Social Phobia kaise dur kare

जिंदगी मे हर किसी के साथ कुछ ना कुछ घटनाए होती रहती है। व्यक्ति जब जिंदगी को जीना शुरू करता है तब या तो बचपन मे या बडे होने पर उसके दिलो दिमाग मे कुछ ना कुछ ऐसा भय या डर बैठ जाता है कि वह फिर डरने लगता है। आजकल इस तरह के कितने ही लोग है जो फोबिया (Phobia) नामक बिमारियों से ग्रस्त है। पर यह लोग समाज के डर से ही अपना इलाज नही करवाते है । और सारी उम्र फिर यह डर मे ही गुजारते रहते है । कही कही कोई बचपन मे घटी घटना भी बहुत ही दर्द दे जाती है जो जिंदगी भर फोबिया के रूप मे रहती है । इसमे किसी व्यक्ति विशेष प्रकार की चीज़ों एवं क्रियाओ से डरने लगता है। जिससे खतरनाक दौरे जैसा भी पड जाता है। तो आइए जानते हैं फ़ोबिया क्या है (What is Phobias) :-

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फोबिया (Phobia ) मनोविकार है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति फोबिया पीडित व्यक्ति के साथ हर पल ऐसे समय रहता है जिससे वह डर रहा है तब भी बिना चिकित्सक के भी बहुत हद तक ठीक हो जाता है। फोबिया मे व्यक्ति के जीवन ही नही आसपास की किसी घटना का भी असर हो सकता है। या छोटेपन मे कोई आंखो देखी किसी घटना को हटा नही सकने के कारण भी होता है।

आखिर सोशल फ़ोबिया क्या है ( What is social  phobia )

सोशल फोबिया भी इसी तरह का एक फोबिया होता है इसमे व्यक्ति समाज मे जाने आने और किसी से बात करने तक मे घबराता है । यह घबराहट इतनी तेज मात्रा मे होती है कि व्यक्ति का दिल जोर जोर से धडकने लगता है। और कभी कही जान तक पर बन आती है।
वर्तमान में भाग दौड़ भरी लाइफ स्टाइल  मे कभी कही कोई बात का असर ऐसा दिलो दिमाग के अंदर के आत्मविश्वास को हटाकर एक भय बैठ चुका होता है। इसमे बहुत से लोगो का उपचार तो अच्छे वातावरण से ही हमे मिल जाता है।

फोबिया के कारण (causes of phobia )

फोबिया एक प्रकार से हर किसी मे होता है। यह बात भी सत प्रतिशत सही है । यह चौकाने वाली बात होती है । कारण यह हैं कि बढती जनसंख्या और आज के इस आधुनिक युग की दौड मे हर कोई जब दौड रहा है और तरह तरह की घटनाए वह रोज पढ और देख रहा है तो आज का मानव यह डर पालकर बैठ गया है कि कुछ मत किसी से कहो अपने मे रहो । वह सत्य को सत्य कहने पर डरता है। सुनी हुई बात नही कहता गवाह देने पर डरता है। केवल अपने परिवार तक सीमट गया है। और हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भय रखता है ,भले वह कितना भी पढा लिखा क्यो न हो।

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आज के इस युग मे शांति भाईचारे की भावना का भी खत्म होना मानव के अंदर फोबिया बताता है। जरा जरा सी बात पर किशोरावस्था तक के बच्चे चिल्लाने गाने लगते है तथा मौत तक को गले लगाते देखे जा रहे है। यही सबसे बड़ा फोबिया कारण (causes of phobia ) है जो यह सब मानसिक फोबिया यानी अंदर के डर को दर्शाता है।

ऐसे दूर करे फ़ोबिया को ( Treatment of phobias )
डॉक्टर्स इसे साइकोथैरिपिस्ट की सहायता से भी मन मे बैठे डर को मिटाने की कोशिश कर सकते है। और इससे मरीज के अंदर फिर जीने की ललक पैदा की जा सकती है। जब कभी हमे ऐसा लगता है। तब हमे शांत चित होकर आंखे बंद करके जोरो से सांस को अंदर बाहर करते हुए, प्राणायाम करना चाहिए और फिर एसे विचारो को दिमाग मे लाना चाहिए जो उन्नति या डर भगाते हो। यदि एसे विचार ना आए तो सबसे आसान तरीका होता है किसी भी ईश्वर की तस्वीर को देखते रहना। उनको देखते नये नये विचार आने लगेगे और व्यक्ति जिससे डर रहा था उससे उसका ध्यान हट जाता है। वह ईश्वरीय बातो को देखने समझने लगता है  और यही पर हम इस भंयकर परिणाम देने वाले रोग से मुक्ति पा लेते है।

श्रीमती ममतावैरागी तिरला धार
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