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Love Poems पढ़े शानदार दिलकश प्रेम काव्य पंक्तियां, चाहत

Love Poems पढ़े शानदार दिलकश प्रेम काव्य पंक्तियां, चाहत


Love poem

दोस्तों प्रेम केवल ढाई अक्षर का है मगर ये पूरी कायनात इसी चलती है । छोटा मगर बड़े काम की चीज़ है । ये हो तो पहली नजर में जाता है मगर इसे निभाने के लिए उम्र कम पड़ जाती है । अब सवाल ये है कि प्रेम क्या है ? What is love ? क्या विपरीत लिंगी से आकर्षण ही प्यार है । नहीं आकर्षण और प्यार में जमीन आसमान का अंतर है । प्रेम ह्रदय से उपजा भाव है जिसे दिल से महसूस किया जा सकता है । जबकि आकर्षण केवल बाहरी है । केवल सुन्दरता के प्रति आकर्षित होती है । इसे मिटाना आसान है मगर प्रेम को नहीं मिटाया जा सकता है । जिसे हो जाता है बस वही उनकी दुनिया है । वही उनका संसार है । उसे देख देखकर जी रहा होता है । तो इसी कड़ी में हम आपके लिए लेकर आये है Love poem पढ़े दिलकश प्रेम काव्य पंक्तियां चाहत -


1. Love poem - shikayat ( शिकायत )


उन नजरों ने, सब कुछ लूटा, 

नजरों से अब शिकायत कैसी। 

                महसूस किया फिजा़ में तुमको, 

                 महक   उठी  थी,  सांसे   मेरी, 

                 उम्र थी,  जी दिलकश लम्हों में, 

                 अपने लम्हों से, शिकायत कैसी। 

हर अरमां से, बढ़कर तुम थे, 

 उम्र  गुजार  दी  इबादत में,

कुबूल हुई ना दुआ  हमारी, 

अपने खुदा से शिकायत कैसी। 

                      अरमां बहुत थे, कुछ कहते तुम्हें, 

                      नसीब था, मिला  टूटा दिल हमे, 

                       जब तुमको  रब  मान    चुके थे, 

                       फिर  तुझसे  शिकायत  कैसी । 

    उन नजरों ने, सब कुछ लुटा, 

   नजरों से अब शिकायत कैसी ।

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◆ पढ़े दिलकश प्यार भरी पंक्तियां - तलाश मुहब्बत की

2. Love poem - chahat  ( चाहत )

पहली नजर के मिलन में, 

 थी, चाहत की मृगतृष्णा, 

 झुके नैनो से बरसे, 

  प्यार की कस्तूरी। 

            जब हाथ लिया हाथों में, 

             चहक उठी मृगतृष्णा, 

             हाथों में मुझको धामा, 

             थी पाकीजा कस्तूरी । 

बातों मुलाकातों की, 

 लंबी राह मृगतृष्णा, 

एक हो जाए रह गुजर,  

 ख्वाब बना कस्तूरी । 

                  बेसब्रा मन, चाहे तुझको, 

                   प्यार तेरा  मृगतृष्णा, 

                   महका मेरा तन मन, 

                    यादें तेरी कस्तूरी।


       मित्रों आपको यह काव्य पंक्तियां कैसी लगी कमेंट करके अवश्य बताए ।। सोनिका कुलश्रेष्ठ, कृभको, शाहजहांपुर ।।

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