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Anahat naad meditation क्या है ? अनहद नाद से दिव्य आवाज कैसे सुने

Anahad naad meditation क्या है ? अनहद नाद से दिव्य आवाज कैसे सुने 



Anahad naad meditation kya hai.

Anahad naad meditation. योग साधना हमारे शरीर के रहस्यों एवं विभिन्न प्रकार का शक्तियों को जागृत करने का अनोखा तरीका है । इतना ही नहीं परमात्मा का संदेश भी इस योग से सुना जाता है । कुछ साधको से आकाशवाणी शब्द सुना होगा या फिर दैवीय संदेश सुना होगा उसे Anahat नाद कहा गया  है । योग द्वारा मानव शरीर के भीतर से एक दिव्य वाणी उत्पन्न होती है जिसे अनाहत नाद कहा गया है । यह आवाज़ बिना किसी आहत से आती है । अनहद नाद शरीर के अंदर से उत्पन्न होने वाली ध्वनि है । जो अनादी काल से उत्पन्न हो रही है । तो चलिए जानते अनाहद नाद क्या है -

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 what is Anahad naad meditation ~

अनहद नाद का अर्थ - Meditation का एक साधन । वह नाद / शब्द जो दोनो हाथो के अंगुठों से दोनो कोनो की लंबे बंद करके ध्यान करने से अपने ही भीतर सुनाई देता है । अनहद नाद ( Anahad naad ) यानी बिना किसी स्त्रोत के आने वाली एक दिव्य आवाज है । अनहद नाद एक ईश को निकट पाने का एक माध्यम है । इसके प्रकट होने पर आत्मा परमात्मा का रस प्राप्त करती है । 

जब आपका विचार शांत होने लगता है और थोडी देर के लिये कोई विचार नहीं रहता तो इसका अर्थ ये कदापि नहीं है । कोई चीज  बाहर से सुनाई नहीं देगी/ अंदर की चीज नहीं सुनाई देगी । बहुत सारी चीज बाहर की भी आती पर आप शांति का अनुभव इतना करते हो जितने आप शांत हो गये होते हैं तो उस समय आपको आपकी मस्तिष्क की आवाज सुनाई देती है । वो मस्तिष्क की आवाज जो एक मशीन हैं और उसी को हम अनहद नाद कहते है ।


ध्यान की गहराई में जाने से आत्मा का अनुभव -

जो साधक नियमित रूप से Meditation कर रहा हैं । जब ध्यान के दौरान जब साधक विचार मुक्त ( thoughts less ) हो जाता है । बाहरी आवाजे बिल्कुल बंद हो गई हो । सारे thought process बंद हो गये हो तब अपने आप को ज्यादा अनुभव करने लगता है । 

जब वह खुद से बात करता है । अपनी आत्मा से परमात्मा के मिलन का अनुभव कर सकता है । अगर इंसान अकेला ही बचा हो तो अपने आपको अनुभव करता है । उसे दिव्य वाणी का अनुभव होता है । जो सुकून एवं शांति का एहसास देता है ।


अनहद नाद को कैसे सुने ? Divya awaj kaise sune -

अनहद नाद ( Anahad naad ) की ध्वनी को हम कैसे सुने ? यही परमात्मा की आवाज है । जितने भी धर्म हैं, सभी ने इस ध्वनि के बारे में कुछ ना कुछ लिखा हैं । कोई इसको voice of silence  कहता हैं । कोई अनहद नाद कहता है । तो यह ध्वनि क्या है ? ध्वनी दो प्रकार की होती है -

1. आहत ध्वनि - जब दो चीज टकराती हैं तब यह ध्वनी उत्पन्न होती है । ये आकाश से टकरा कर पहुँचती है इसलिए इसे आहत ध्वनि कहा गया है ।

2. अनहद ध्वनि - जहा कोई किसी से टकराता नहीं हैं लेकिन एक ध्वनि पैदा होती है । जब ब्रह्मांड का निर्माण हुआ उस समय जो vibration था, जो ध्वनि थी वो ध्वनि अनहद नाद हैं/ आप जिस vibration से पैदा हुये । उदाहरण - Radio के ribbon frequency पर अलग अलग चैनल सुनते है ।

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व्यक्ति के अंदर यह ध्वनि विद्यमान है । जो vibration  विद्यमान है । उसी से आपका जन्म हुआ है । उस नाद से आपका जन्म हुआ है । जब आप ध्यान में गहरे जाओगे तब आपको वो ध्वनि सुनाई देगी । आजकल ध्यान करने बैठता हैं तो बाहर से कोई भी ध्वनि हो जाती है तो उसका मन उचक जाता है । Disturb हो जाता हैं, तो ऋषी मुनियों ने सोचा  क्योंकि इसी ध्वनि को ही माध्यम बना लिया जाये परमात्मा प्राप्त करने का क्योंकि ध्वनि ही हमको disturb करती हैं ध्यान लगाने में । 

आप अंदर गहराइयों में उतरोंगे तो आपको वह ध्वनि सुनाई देगी जो अलग अलग आवाजे होगी ।  एक के पिछे दुसरी आवाज छूपी होगी । अनगिनत, रात के सन्नाटे जैसी आवाज होगी। यह आवाज सुनते सुनते आप अपने देहभान को भुल जाओंगे । खुद को भुलना क्या हैं ? वही तो ध्यान है । वही तो परमात्मा की प्राप्ति है । इस दिव्य आवाज को अनहद नाद ( Anahad naad ) कहा गया है और जिसको योगी - संत सुन सकते है ।


Benefits of anahad naad meditation.

कैसे करें अनाहत चक्र का ध्यान ।  Anahad naad Meditation Technique in Hindi ?

  • अनाहत चक्र / अनहत नाद ध्यान के लिये वायु मुद्रा धारण करें । अपने हाथ की तर्जनी उंगली यानी सबसे छोटी अंगुली को अंगुठे के नीचे दबालें । ध्यान रखें कि हाथ की शेष सभी उंगलिया एकदम सीधी हो ।
  • ध्यान को अनहत चक्र  यानी हृदय में लगाये ।
  • 10-12 बार लंबी सांस ले सकते है ।
  • कुछ समय बाद आपको नीले रंग की आभा का अनुभव होने लगेगा ।
  • जब आप इसी तरह आगे बढते हैं तो आपको हृदय की ध्वनी सुनाई देने लगती है । जब तक की सांसे तेज न चले लेकिन  धीरे धीरे हम सूक्ष्म होने लगते है ।
  • आखिर में यह आवाजे सुनना बंद हो जाये और साधक को सिर्फ अनहद नाद सुनाई देगा । ये नाद बिल्कुल वैसे ही हैं जैसे की ब्रह्मांड में सूर्य से निकलने वाली ओम की आवाज ।


अनहत नाद के फायदे । Benefits of Anhad naad meditation -

नाद मन की बिखरी हुई शक्तियों को एकता के सूत्र में बांधने में सहयोगी है । अनहत नाद से सृष्टि प्रतिपल सृजित और क्षरण भी हो रही है । वर्णन असंभव है क्योंकि इससे पूरी सृष्टि को खुद को भी न सिर्फ जाना जा सकता है । इस Anahad naad Meditation से मनुष्य ईश को समीप महसूस करता है । 

  • नाद योग साधना से शरीर का नाड़ी तंत्र खुल जाता जिसे पूरे शरीर में ऊर्जा संचार होता है ।
  • मन मस्तिष्क में शुद्धता का संचार होता है । एवं एकांग्रता का आभास होता है ।
  • मानव विचारों में पवित्रता आती है । याददाश्त तेज होती है ।
  • शांति का आभास होता है जिससे न केवल सुख की अनुभूति होती है बल्कि सुंदरता में भी वृद्धि होती है ।
  • इस ध्यान से सूक्ष्म संसार के बारे में सूक्ष्म तरीके से जान सकते है । कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है ।


प्रश्नोत्तरी । FAQ of Anahad naad meditation -

1. अनहद नाद का अर्थ क्या हैं ? What is Anahad naad meditation ?

जबाब - अनहद नाद योग का साधन है । जिसे दिव्य वाणी का अनुभव होता है । इसे आकाशवाणी भी कहा जा सकता है । यह आवाज बिना किसी स्त्रोत से या टकराने से आती है । यह केवल Meditation द्वारा सुनी जा सकती है ।


2. अनहद नाद कब सुनाई देता है ?

जबाब  - जब आप नियमित रूप से एकांग्रता से वायु मुद्रा में बैठकर ध्यान की गहराईयो में उतरोंगे तभी दिव्य वाणी को सुना जा सकता है ।


3. अनहत ध्वनि कब उत्पन्न होती है ?

जबाब  -  जब आपके विभिन्न विचार शांत होने लगते हैं तब यह ध्वनि उत्पन्न होती है ।


4. अनहद ध्वनि कौन सुनते है ?

जबाब  - अनहत ध्वनि संत एवं साधू सुन सकते है । इसके अलावा नियमित योग साधना करने वाले साधक  सुन सकते है ।


5. ओंकार किसे कहा गया है ?

 जबाब - अनहद नाद की मूलध्वनी को ओंकार कहा जाता है ।


6. प्राणायाम क्या होता है ?

जबाब - प्राणायाम ध्यान का एक तरिका है । जिसे साधक साधना करता है ।


7. निलरंग आभा का अनुभव कब होने लगता है ?

 जबाब  - जब आप नियमित रूप से 10-12 बार लंबी सांसे लोगे तो कुछ समय पश्चात आपको निलरंग आभा का अनुभव होगा ।


8. अनहत नाद से क्या लाभ होता है ?

जबाब  - इसी से हर रोज सृष्टी का निर्माण ओर विध्वंस भी होता है । इसे सुख व शांति का आभास होता है । कुंडलिनी जागरण का अनुभव किया जा सकता है ।


9. क्या ओम मंत्र का जप नित्य करना फायदेमंद है ?

जबाब - मंत्र जाप आप प्रारंभ में करते होतो उससे मस्तिष्क को शान्ति मिलती है ।


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