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थॉयराइड ( Thyroid ) के कारण, लक्षण, परहेज एवं घरेलू उपाय

थॉयराइड ( Thyroid ) के कारण, लक्षण, परहेज एवं घरेलू उपाय                 

Thyroid

आजकल के खान पान  और अव्यवस्थित जीवनशैली  के अनुसार बीमारी बढ़ती ही जा रही है आज के समय में गंभीर से गंभीर बीमारी आम हो चुकी है इन्ही बीमारी में से एक है थायरॉइड ( Thyroid ) जो गंभीर बीमारी होकर भी अब आम बीमारी बन चुकी है इसका एक और मुख्य कारण है तनाव पहले थायरॉइड अधिक बढ़ती उम्र के लोगो को और महिलाओ को होता था लेकिन अब ये समस्या बच्चों में भी दिखने लगी है । भारत में 2017 के रिपोर्ट के अनुसार 32 फीसदी लोग थायरॉइड से पीड़ित  है । एक अंदाज़ा लगाए तो 40 मिलियन कह सकते है । अमेरिका के ए ए आर पी के अनुसार थायरॉइड उन 9 भयंकर बीमारी में शामिल है जिसे पहचानने में डॉक्टर भी भूल कर देते है । भारत जैसे देश में ज़्यादातर लोग थायरॉइड से अनजान है । लेकिन हमें पता होना चाहिये ताकि शुरुआती लक्षण नजर आते ही ट्रीटमेंट शुरू कर देना चाहिए तो चलिए जानते है थॉयराइड ( Thyroid ) के कारण, लक्षण, बचाव एवं घरेलू उपाय -

थॉयराइड क्या है ? What is Thyroid in hindi ?

थायरॉइड एक ग्रंथि है जो हमारी गर्दन के निचले  हिस्से में होती है यह ग्रंथि हार्मोन बनाती है जिसे टी4 विभिन्न हार्मोन बनाता है । यह हार्मोन हमारी बॉडी में बहुत से महत्वपूर्ण काम करता  है जैसे चयापचय को कंट्रोल करना, शरीर के ऊर्जा को कंट्रोल करना, प्रोटीन के उत्पादन को कंट्रोल करना आदि । यह हार्मोन हमारे शरीर के सभी हिस्सों पर काम करता  है जैसे हार्ट, लीवर, किडनी । आमतौर भाषा में कह सकते है ये हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है । बच्चो का दिमाग विकसित करने में भी इन हार्मोन्स की भूमिका  अधिक होती है ।

2 थायरॉइड हार्मोन का काम 

थायरॉइड हार्मोन का काम है पेट में पाचक रस के  गति को बढ़ाना हार्मोन्स  को कंट्रोल करना  और थायरॉइड हार्मोन ऊतकों के बढ़ने  मदद  करता  है ।

3  थायरॉइड रोग  के प्रकार - Type of Thyroid -

अगर आप सामान्य तौर  पर देखे तो थायरॉइड दो तरह के दिखेंगे लेकिन अगर विस्तृत रूप से देखे तो थायरॉइड 4  प्रकार के होते है जिनमे से है -

हाइपोथायरायडिज्म ( Hypothyroidism ) थायराइड - 

यह थायरॉइड का कारण  है थायरॉइड ग्रंथि से थायरॉइड हार्मोन के पर्याप्त मात्रा में उत्पादन नही  होना । सरल भाषा में कहें तो थायरॉइड कम होना थायरॉइड ग्रंथि एक  अन्य ग्रंथि द्वारा नियंत्रित होती है यह आयोडीन के कमी के कारण होता है । पिट्यूटरी ग्रंथि शरीर में हो रहे हार्मोन्स को नियंत्रित करती है ऐसे में इसका  काम थायरॉइड उत्तेजक हार्मोन्स बनाना होता है । जो यह बताती है आखिर  कितने मात्रा में थायरॉइड हार्मोन बनाना हैं । अगर इसमें आपका TSH असमान्य रूप से बढ़ रहा है यानि आप हाइपोथायरायडिज्म थायराइड से प्रभावित है ।

हाइपर थाइरॉयडिज़्म ( Hyper thyrodism ) थायराइड -

थायरॉयड द्वारा अधिक मात्रा में हार्मोन बनाने पर शारीरिक ऊर्जा का उपयोग मात्रा से अधिक होने लगता है इसे हाइपर थायराइडिज्म कहा जाता है । खून में बढे हुए गलग्रंथि हार्मोन की नैदानिक स्थिति भी एक कारण है। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि अतिगलग्रंथिता और थायरोटोक्सीकोसिस दोनों सामान नहीं हैं। उदाहरण स्वरूप थायरोटोक्सीकोसिस बजाय इसके बहिर्जात थाइरॉइड हार्मोन के अंतर्ग्रहण या थाइरॉइड ग्रंथि की सूजन के कारण हो सकता है, जिसकी वजह से यह अपने थाइरॉइड हार्मोन के भंडार से स्रावित होने लगता है ।

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4. थायरॉइड रोग के लक्षण

हाइपरथायराइडिज्म के लक्षण इस प्रकार है ।

  • वजन कम होना ।
  • घबराहट चिंता, परेशानी ।
  • घेंघा रोग ।
  • सांस फूलना ।
  • दिल की धड़कन तेज होना  ।
  • कम नींद आना  ।
  • आँखो में सूखापन ।
  • बाल झड़ना  ।

हाइपोथायरायडिज्म थायरॉइड के लक्षण 

 आपने हाइपोथायरायडिज्म थायरॉइड के बारे  में पढ़ ही  लिया अब इसके लक्षण जानते है  

  • वजन बढ़ना ।
  • थकान ।
  • नाखूनों और बालों का कमजोर होना ।
  • त्वचा का रूखा होना ।
  • ठंड लगना ।
  • अवसाद एवं मानसिक तनाव ।
  • गला बैठना एवं मांसपेशियों में अकड़न ।

5 थायरॉयड रोग होने  के कारण

हाइपरथायराइडिज्म थायराइड के अन्य कारण है जैसे -

  1.  ग्रेव्स डीज़ीज़ - हाइपरथायराइडिज्म का सबसे सामान्य कारण ग्रेव्स डिजीज है । ये एक ऑटोइम्यून रोग है जिसमे ऑटो एंडिबोडीज अधिक मात्रा में थायरॉयड हार्मोन का उत्पादन करने के लिए ग्रंथि को उतेजित करती है ।
  2. आयोडीन का अधिक सेवन - थायरॉयड हार्मोन्स के उत्पादन के लिए आयोडीन एक माइक्रोन्यूट्रिएंट है जिससे आयोडीन के ज़्यादा सेवन से इस बीमारी का लक्षण दिख सकता है ।
  3. गर्भावस्था :- महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान कुछ हार्मोनल बदलाव के कारण हाइपरथायराइडिज्म होने के चांस रहते  है ।

हाइपोथायरायडिज्म थायराइड के कारण 

यह सामान्य रूप से तब होता है जब थायरॉइड ग्रंथि बढ़ जाती है जिसे गोइटर भी कहा जाता  है यह थायरॉइड हार्मोन बनाना कम कर देती है हाशिमोटो थायरॉडिटिस एक स्वप्रतिरक्षित रोग है जिसमे शरीर में बनने वाले प्रतिरक्षा  प्रणाली अनुपयुक्त तरीके से थायरॉइड ऊतकों हमला करती है ।

  1. लिम्फोसाइटिक थाइरोडिटिस - इसमें  सूजन सफेद रक्त के कारण होता  है उसको  लिम्फोसाइटिक थाइरोडिटिस के नाम से जाना जाता है ।
  2. पिट्यूटरी जख्म - जब किसी कारण दिमाग की सर्जरी हुई हो उस समय रक्त की आपूर्ति कम  हो जाये उसे पिट्यूटरी जख्म कह सकते है इस  स्थिति में TSH का स्तर कम हो जाता  है ।
Treatment  of thyroid

6. थायरॉइड रोग का घरेलू इलाज - Thyroid ka ghrelu ramban ilaaz -

हम चाहे तो थायरॉइड का उपचार घर पर भी कर सकते है हम सब का मानना  है घरेलू इलाज ज़्यादातर मात्रा में लाभकारी  होता है 

  • थायराइड (thyroid) में हम कुछ काढ़ो का उपयोग कर ठीक कर सकते है जैसे शिग्रु पत्र, कांचनार एवं पुनर्नवा आदि इन काढ़ों का प्रयोग करने के लिए हमें 30 से 50 मिली काढ़ा सुबह खाली पेट लेना चाहिए ।
  • अलसी पाउडर का उपयोग करना  भी बहुत लाभकारी होता  है 
  • थायरॉइड के बीमारी  में नारियल का तेल फायदेमंद होता है इसमें गरम दूध के साथ नारियल के तेल के कुछ बून्द डाल  सकते है ।
  • थायरॉइड  में अश्वगंधा का चूर्ण या पुश्करबून का चुर्ण और शहद और पानी के साथ सुबह सुबह सेवन कर सकते है ।
  • जिन व्यक्तियों को थायरॉइड होता है उन्हें दूध और दही का अधिक सेवन करना चाहिए क्योकि दूध और दही में कैल्शियम विटामिन थायरॉइड को स्वस्थ बनाने में मदद करता है ।
  • जिन व्यक्तियों को थायरॉइड होता है वह व्यक्ति जल्दी थक जाते है इसलिए उन्हें मुलेठी का सेवन करना चाहिए ।
  •  थायरॉइड का ट्रीटमेंट करने के लिए रोगी  को नियमित रूप फलों का रस का सेवन करना चाहिए जैसे नारियल पानी, अनानास, संतरा, एप्पल, गाजर एवं चकुन्दर । इससे थायराईड की प्रॉब्लम दूर करने में हेल्प मिल सकती है ।

Thyroid को कैसे कंट्रोल करें 

7. थायरॉइड के दौरान आपका खान-पान 

  • थायरॉइड के दौरान कम वसा  वाले आहार का सेवन करना चाहिए 
  • फल और सब्ज़ी :- थायरॉइड के दौरान अधिक  मात्रा में फल और सब्ज़ी का सेवन करना चाहिए ज़्यादातर हरे पत्तेदार सब्ज़ी  खाना चाहिए क्योकि इसमें आयरन की मात्रा अधिक होता है जैसा की हमने पहले ही बताया थायरॉइड आयरन की कमी से होता है ।
  • गाय का दूध, दही, नारियल का पानी, अजवाइन नट्स जैसे बादाम काजू सूरजमुखी के बीज का सेवन करे ।
  • गेंहू और ज्वार का सेवन करे ।
  • दाल जैसे मुंग, अरहर, सतु, चना का दाल आदि ।
  • थायरॉइड के दौरान मछली का सेवन कर सकते है ।
  • आलू और शकरकंद कम केलोस्ट्रोल में भी पर्याप्त पोटेशियम देते है ।

8. थायरॉइड के दौरान मरीज़ की दैनिक दिनचर्या -

  • सुबह जल्दी उठे दवाई लेने  के 10 मिनट बाद गर्म पानी पिए ।
  • दवा लेने के पश्चात 1 घंटे तक कुछ भी नहीं खाएं ।
  •  सुबह ब्रेकफास्ट के साथ जूस पीने चाहिए जैसे लौकी एवं गेंहू का ज्वारों जूस । इसके अलावा आप एलोवेरा जूस पी सकते हैं । कहने का मतलब फाइबर जूस का ज्यादा सेवन करें ।
  • थायरॉइड रोगी के लिए यह आवश्यक है कि अपने दैनिक जीवन में एक्सरसाइज अवश्य करें । सुबह सुबह योग करे या फिर हल्की दौड़ लगाए ।
  • भूखे बिल्कुल न रहे । समय पर खान पान करते रहे क्योंकि भूखे पेट रहने पर थायरॉइड ग्रंथि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।
  • नियमित रूप से दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर उसे गर्म करके पिये इससे थायरॉइड को कंट्रोल किया जा सकता है । यदि आप दूध में हल्दी मिलाकर पीना पसंद नहीं है तो आप हल्दी को भूनकर, पानी में गर्म करके या किसी अन्य तरीके से उसका सेवन कर सकते हैं ।
  •  थायरॉइड में जितना आराम दवा से मिलता है, उतना ही आराम प्राणायम से भी होता है । इसलिए कोशिश करें कि रोज आधे घंटे सर्वांगासन, मत्स्यासन और हलासन आदि जरूर करें ।
  • समय पर बॉडी में आयोडीन का लेवल का चेकअप करते रहें क्योंकि मेटाबॉलिज्म के सही तरीके से काम करने के लिए आयोडीन आवश्यक होता है ।शरीर में आयोडीन की कमी न आये इनके लिए समय-समय पर डॉक्टर से भी चेकअप करवाएं ।
  • तनाव मुक्त रहने की कोशिश करे एवं स्मोकिंग एवं एल्कोहल जैसे नशीले पदार्थों के सेवन से बचें ।
  • धुप का  सेवन करे ।
Thyroid

Thyroid ke mariz Kya na khaye in hindi

9. थायरॉइड के लिए परहेज

मैदा, नए चावल एवं राजमा, छोले, कुलथ । पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज, खट्टे फल जैसे अंगूर, नींबू, टमाटर, बैंगन एवं सोयाबीन से परहेज़ करें ।

बिलकुल ही न खाये - तैलीय मसालेदार भोजन, अचार, अधिक तेल, कोल्डड्रिंक्स, मैदे वाले पर्दाथ, शराब, फास्टफूड, सॉफ्टड्रिंक्स, जंक फ़ूड, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, मांसहार सूप, कच्ची सब्जी, ब्रोकोली, पत्ता गोभी, फूल गोभी एवं भिंडी ।

Thyroid ke liye yoga in hindi

10. थायरॉइड के लिए योगासन

  • उज्जायी प्रायाणाम :- उज्जायी प्रायाणाम  गले वाले हिस्से के लिए होता  है । जिन लोगो को अपना  थायरॉइड संतुलन करना है उसमे इसका वार्मिंग प्रभाव भी फायदे की है उज्जायी प्रायाणाम करने से गले की ग्रंथि में कम्पन होता है जिससे वो और अच्छे से  काम कर पाता है ।
  • मस्त्यासन : इससे रक्त  संचार  सही  प्रकार से  काम  करता  है । साथ ही गले के तनाव को कम कर थायरॉइड ग्रंथि को उत्तेजित करता  है ।
  • सर्वांगासन :- इसके  नाम  से ही पता चल रहा है ये आसन  पुरे शरीर का है  इसमें पूरा  शरीर  काम  करता है  और  गर्दन वाले  भाग  में रक्त संचार को सही करने मे मदद करता है ।
  • सेतु बंधासन :- यह  थायरॉइड  के समय  सबसे  अच्छा  आसान  है  जिसमे योग के समय गर्दन पर ज़्यादा  काम करता  है ।
  • इसके  अलावा  हलासन, जानुशीर्षासन, मार्जरी आसन, बालासन  आदि  आसन  को योग में शामिल  कर सकते  है ।

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