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Kundalini shakti कुंडलिनी शक्ति को कैसे जागृत करें

Kundalini shakti कुंडलिनी शक्ति को कैसे जागृत करें 

Kundalini shakti ko kaise jagrit kare

मानव शरीर मे कुदरत द्वारा प्रदत्त चमत्कारिक शक्तियों का भंडार पाया जाता है । मगर आम इंसान न ही देख सकता है और न ही महसूस कर सकता है क्योंकि ये शक्तियां सोई हुई होती है । इसे जाग्रत करना पड़ता है । कुंडलिनी शक्ति भी इनसे से एक है । Kundalini shakti एक ऐसी शक्ति है । एक ऐसा Power है जिसे इंसान महामानव बन जाता है । वह प्रकृति की हर शक्ति से वाफिक हो जाता है । देव समान दिव्य दृष्टि कारक बन जाता है । भगवान शिव से लेकर अब तक न जाने कितने ही महामानवों ने कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करके इस भूमि पर अपना चमत्कार दिखाया जैसे श्री राम, श्री कृष्ण, वेदव्यास, चैतन्य महाप्रभु, मीरा बाई, स्वामी विवेकानंद, गौतम बुद्ध, महावीर एवं स्वामी निखिलेश्वरानंद जी सहित अनेको महामानवों ने योग साधना द्वारा kundalini shakti को जाग्रत किया । तो चलिए जानते है Kundalini shakti ko kaise jagrit kare -

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कुंडलिनी शक्ति क्या है ? What is Kundalini power ?

 मानव शरीर के अंदर सात चक्र होते हैं इन सातों चक्रों की उर्जा को कुंडली चक्र भी कहा जाता है । यह चक्र  मूलाधार चक्र, स्वादिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, विशुद्धि चक्र, आज्ञाचक्र एवं सहस्त्रार चक्र के नाम से जाने जाते है । कुंडलिनी शक्ति मूलाधार चक्र के निचे सर्प की भांति कुंडली मारे सुप्त अवस्था मे विराजमान होती है । इन चक्रो में ऊर्जा का भंडार होता है । इनमें से तीन चक्र जागृत हो जाए तो वह मानव शरीर सबसे स्वस्थ के रूप में देखा जाता है यही सातों चक्र को जागृत करने के बाद इसे कुंडलिनी शक्ति ( Kundalini shakti ) कहा जाता है। यह शक्ति जागृत कर मनुष्य अन्य मनुष्यों से अलग कर देती है तथा ईश्वर से एक करीबी रिश्ता बनने लग जाता है । ऐसे मनुष्य जन्म - मृत्यु, सुख - दुख की  दृष्टि से ऊपर उठकर सोचने लग जाते हैं। मन बुद्धि विचार आदि में ये बहुत आगे होते है तथा अन्य की तुलना में बेहतर होते हैं। कुंडलिनी शक्ति जागरण के बाद मनुष्य की असीम ऊर्जा विराजमान हो जाती है। 

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कुंडलिनी शक्ति को कैसे जागृत करें ? how to awaken kundalini powers ?

कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के सही उपाय है कुछ मनुष्य के भीतर यह शक्ति आध्यात्मिक साधना करने के उपरांत जागृत हो जाती है तथा कुछ योग आदि क्रियाओं के पूर्ण होने पर जागृत हो जाती सभी में शक्ति अलग-अलग वजह से जागृत हो सकती हैं इसके जागरण के अलग-अलग नियम है। कुंडलिनी का जागरण आत्मा के विकास में एक प्रमुख घटना है। कुंडलिनी जागृत करने की विभिन्न विधियाँ हैं। अधिकांश तौर पर आध्यात्मिक अभ्यास या योग अभ्यास कुंडलिनी शक्ति के जागरण ( Kundalini power Activation ) में काफी सफल होते हैं। इन विधियों में से अधिकांश को एक योग्य मास्टर या गुरु से सीखना होगा। सभी तरीके सभी को सूट नहीं करते या सभी का मन नही लग सकता है।  एक स्वभाव के हिसाब से और प्रथाओं के आधार पर, एक निश्चित प्रकार की आध्यात्मिक अभ्यास की ओर आकर्षित करने से और लगातार उसी आध्यात्मिक ज्ञान की प्रक्रिया को करते हुए उस कुण्डलिनी अभ्यास को गुरु के मार्गदर्शन में सख्ती से किया जाना चाहिए । Kundalini shakti ko kaise jagrit kare ?

how to awaken kundalini powers
योग ( Meditation ) द्वारा कुंडलिनी शक्ति को कैसे जागृत करे -

योग आदि की लगातार गहन साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत हो सकती है। इसके लिए योग्य गुरु के सानिध्य में योग क्रिया को करना होता है जैसे प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, ध्यान मुद्रा, पद्मासन आदि द्वारा कुंडलिनी शक्ति ( Kundalini shakti ) को जागृत कर सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की मुद्राओ द्वारा भी कुंडलिनी शक्ति को जागृत कर सकते हैं। मुद्राओं का प्रभाव शरीर की भीतरी ग्रन्थियों पर पड़ता है। इन मुद्राओं द्वारा शरीर के अवयवों तथा उनकी क्रियाओं को प्रभावित एवं नियन्त्रित किया जा सकता है। इन चमत्कारिक मुद्राओं की अलग-अलग क्रिया विधि है जो सही तरीके से करनी चाहिए । उनमें से कुछ  महत्वपूर्ण मुद्राओं की क्रिया विधि और उनके फायदे इस प्रकार से है।

  • खेचरी मुद्रा – आजकल बहुत कम लोग इसे जानते होंगे ये एक ऐसी मुद्रा है जिसे करने के उपरांत उड़ने की शक्ति प्राप्त हो जाती है पवन पुत्र हनुमान जी इस मुद्रा द्वारा आकाश में उड़ पाते थे। जीभ को उलट कर और तालू के गड़्ढे में जीभ के अगले भाग को लगा देने को खेचरी मुद्रा कहते हैं। तालू के अन्त भाग में एक पोला स्थान है जिसमें आगे चलकर एक छोटा सा माँस लटकता है, उसे कपिल कुहर कहते हैं। इसी मास के टुकड़े को जीभ के सबसे अगले हिस्से को बार बार सटाने की कोशिश करे और यह कोशिश नित प्रतिदिन करने से कुछ महीने में धीरे धीरे जीभ लम्बी होकर कुहर से सट जाती है । जब जीभ के सटने लगती है, कपाल में  प्राण - शक्ति का संचार होने लगता है और ऊर्जा के इसी संचार से एक बड़ा ही दिव्य आनन्द आता है और शरीर में दिव्य शक्तियां जागृत होने लगती है।
  • महामुद्रा – इस मुद्रा को करने वाले हमेशा जवान व सुन्दर और स्वस्थ बना रहते है। इसे करने में, बाएँ पैर की एडी़ को सीवन भाग में लगावें और दाहिना पैर लम्बा कर लें। लम्बे किये हुए पैर के अँगूठे को दोनों हाथों से पकड़े। सिर को घुटने से लगाने का प्रयत्न करते हुए अपनी नाक के बायीं तरफ से लम्बी साँस खींचकर कुछ देर कुम्भक करके फिर नाक के दायीं तरफ से रेचक प्राणायाम कीजिए । शुरुआती में 5 प्राणायाम बाईं मुद्रा से करने चाहिये । फिर दाएँ पैर से भी उतनी ही देर यह मुद्रा करें जितनी देर बाएं से की थी। इससे काम, क्रोध, लोभ, अहंकार आदि का नाश होता है तथा रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • शाम्भवी मुद्रा – इस मुद्रा के अनुसार सुखासन या पद्मासन में बैठकर अपनी आंखे बंद करके दोनों भौहों के बीच ( जहां तिलक या बिंदी लगाते ) ध्यान लगाने की विधि को शाम्भवी मुद्रा कहते हैं। भगवान शिव के द्वारा साधित होने के कारण इस मुद्रा का नाम शाम्भवी मुद्रा पड़ा है। यह मुद्रा तीसरे नेत्र को भी जगाता है जिससे दिव्य लोकों का दर्शन होता है, आनन्द का अनुभव होता है तथा शरीर के सारे रोगों का नाश होता है और कुण्डलिनी जागरण में सफलता जरूर मिलती है।
  • अगोचरी मुद्रा – इस Poss में ध्यान की मुद्रा में बैठकर नाक से 4 अंगुली आगे के शून्य स्थान पर दोनों आंखों की दृष्टि को एक बिन्दु पर केन्द्रित करके ध्यान लगाना ही अगोचरी मुद्रा कहलाता है। ये मुद्रा पाप का नाश करती है और ईश्वर से आध्यात्मिक रिलेशन बनाती है। इसके अतिरिक्त नभो मुद्रा, महा-बंध शक्तिचालिनी मुद्रा, ताडगी, माण्डवी आदि बहुत तरह की मुद्राओं के बारे में "घेरण्ड सहिता" में बताया गया है।

मंत्रो ( Mantro ) द्वारा कुंडलिनी शक्ति को जागृत करें

कुंडलिनी जागृत करने के लिए मंत्र साधना पहली विधि है। मंत्र एक पवित्र शब्द, या शब्दों का समूह होता है जो मनुष्य में आध्यात्म को बढ़ाता है। इन मंत्रों की खोज ऋषियों मुनियों द्वारा की गई थी और इन्हें गुरु शिष्य परंपरा के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी प्रदान किया जाता रहा है। मंत्र जाप के अभ्यास से कुंडलिनी शक्ति ( Kundalini shakti ) को जाग्रत किया जा सकता है, जो कि एक निश्चित या अनिशिचत संख्या में प्रतिदिन मंत्र के जाप द्वारा पूर्ण होती है।  यह किसी योग्य गुरु के सानिध्य में किया गया अभ्यास है जिसे मनुष्य एक समय के पश्चात खुद भी कर सकता है। कुंडलिनी शक्ति को मंत्रों से जागरण करना आसान है । यह एक लंबे समय और मंत्र के बहुत सारे जाप के उपरांत ही सम्भव है। मंत्रो के द्वारा कुंडलिनी जागरण एक आसान और सुरक्षित विधि भी है।

रेकी विधि ( Reki vidhi ) द्वारा औरा क्लीनिंग और कुँडलिनी जागरण कैसे करें

रेकी विधि द्वारा ध्यान मुद्रा में स्थित होकर अपने औरा को क्लीन करके शक्ति के संचार को जागृत करना तथा कुछ वैज्ञानिक क्रिया को ध्यान से करना और उसे लगातार दोहराते हुए एक विशिष्ट अनुशासन के साथ तथा गुरु के सानिध्य में सभी क्रियाओं को पूर्ण करना। इन सभी क्रियाओं को पूर्ण करने के उपरांत शरीर मे एक विशिष्ट ऊर्जा का संचार होता है जो कुँडलिनी शक्ति ( Kundalini shakti ) जागृत होने के लक्षण हैं।

मोनिका गुप्ता

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