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प्यार क्या होता है । What is love

प्यार क्या होता है ? What is love ?


What is love


दोस्तों I love you शब्द सुनकर ऐसा लगता है कि उनके साथ कोई जन्मजन्मो का रिश्ता है । उनके लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते है । सारी दुनिया एक तरफ और love एक तरफ है । इस शब्द के पीछे हीर रांझा, जुली रोमियों ने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी । प्यार की दुनिया में अमर हो गए । असल में What is love ? आज हम इसी सवाल का जबाब ढूंढने की कोशिश करते है । ढ़ाई अक्षर का यह शब्द प्राणी मात्र के लिये महत्वपूर्ण जरूरी हैं और हमारी अन्तर आत्मा में निश्चित ही स्थान बनाये रखने वाला हैं। Love पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है, और लिखा जा भी रहा है, और भविष्य में भी लिखा जाता रहेगा । हर प्राणी में हर उम्र में हर अवस्था में प्यार की महती अवश्यकता महसूस की जाती रही हैं। हर प्राणी पावन निर्मल निछ्ल प्रेम ( True love ) से रूबरू होना चाहता हैं। प्रेम को आत्मसात करना चाहता है । पर आज प्राणी मात्र उस दिव्य प्रेम के दर्शन करने की अभिलाषा रखता हैं। प्रेम, प्यार जो केवल और केवल प्रेम हो जहा न स्वार्थ हो न छल हो न कपट हो न दिखावा हो न अहंकार हो उस दिव्य, अमर, अजक, अमीट पावन प्रेम को सब आत्मसात करना चाहते हैं। आइए जानते है Pyar kya hota hai -

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प्यार क्या होता हैं ? What is love ?

एक प्रश्न हर मन मे उठता जरूर हैं प्यार क्या है what is love ? और साधारण सा उत्तर होता हैं दिल से किसी के प्रति गहरा लगाव । जिनके जीया भी नहीं जा सकता है । दिल की आवाज जिसे एक दिल ही महसूस कर सकता है । वैसे भी प्रेम की व्याख्या असम्भव ही रही हैं। इसका यह मतलब कता ही नही की प्रेम कि विवेचना नही की गई बिलकूल की गई पर हम ही प्रेम के उन स्वरूपो को आत्मसात नही कर पाये । हर युग मे संत महात्माओं महापुरूषो ने अपने अपने स्तर पर प्रेम को बड़े ही अच्छे से रूप मे सरल रूप मे जो उस समय के प्राणी मात्र को आसानी से समझ आ जाये एसी व्याख्या की हैं। पर आज तक मानव प्रेम को समझ ही नही पाया की आखिर है क्या वह Love के एक रूप को पकड़ता है तो दूसरे से वन्चित रह जाता हैं और यह दौर निरतर एसे ही चलता रहता हैं और अंत मे पुछ ही बैठता है प्रेम क्या हैं ? मै इससे हर दम यु अन्जान क्यो हूँ ? असल मे Love एक feeling है । एक एहसास है । दिल से निकली हुई एक आवाज है । Love को सिर्फ महसूस किया जा सकता है । what is love in hindi.

प्यार के प्रकार - Type of love -

  • बाल प्रेम - यह प्रेम बड़ा ही मासुम, निश्छल, निषकपट, निस्वार्थ होता हैं। अबोध मन आकर्षण रहित इछ्छा रहित और अखण्ड विश्वास इसकी कुछ विषेशता होती हैं। ऐसे ही नही कहा गया की बच्चो मे भगवान बसते है या बलपन ईश्वर का ही एक रूप होता हैं। शायद यही कारण रहता होगा जब हर प्राणी अपने जीवन में सोचता है काश! मैं बच्चा ही रहा होता। तब मेरे जीवन मे भी केवल आनंद मस्ती अपार प्रेम रहता पर यह तो सम्भव नही हैं। जीवन चक्र तो चलने का नाम हैं जो सत्त चलते ही रहता हैं और हमे प्रेम के अलग अलग गुणो से मिलाते ही रहता हैं।
  • किशोर मन का प्रेम ( teenage love )- यही वह समय होता हैं जब लोहा गरम होता हैं तब उसे जीस साचे मे ढ़ालना चाहते है ढ़ाल सकते है। और यही वह समय होता है जब एक दिशा निश्चित उदेश्य मे वह ढ़ल सकता हैं इस समय का प्रेम आकर्षण से प्रेरित भी हो सकता है और सच्चा प्रेम भी हो सकता है यह वही समय होता है जो कम से कम प्रेम के संदर्भ में अस्मर्णिय होता हैं फिर वह आकर्षण से प्रेरित हो या किसी विशेष पहलु के मध्य नजर हुआ हों। हा! जो लोग आकर्षण को प्रेम का नाम देते है जीवन भर वै सच्चे प्रेम को अलग अलग रूपो मे तलासते रहते हैं। और जो प्रेम की कदर जानते है जीवन मे अधिकांश समय प्रेम से आबाद रहते हैं।
  • आत्म प्रेम ( Self love ) - आज कल भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान खुद से दूर होता जा रहा है ऐसे में आत्म प्यार की आवश्यकता होती है । self love means खुद से प्रेम है । प्रेम का अर्थ जितना दुसरो से लिया जाता है । उतना ही खुद से भी जरूरी है । खुद से प्यार करके इंसान दुनिया जीत सकता है । 
  • सच्चा प्रेम ( True love ) - यह प्रेम अधिकांश मे पाया जाता हैं क्यो की हम परिपक्त हो चुके होते हैं समझदार हो चुके होते हैं अतः प्रेम भी यह सभी गुण अपने साथ साथ लिये चलता हैं। सीधे सरल शब्दो मे कहु तो तोल मोल के बोल वाला हो जाता है हम प्रेम के साथ वह सब कुछ चाहते है जो समाज को परिवार को अपने को एक स्तरीय मुकाम हासिल करवाये। इस उम्र में प्रेम हो या शादी दोनो ही समझदारी भरा कदम कह सकते हैं। हमने देखा भी हैं प्रेम विवाह के सफलता का % बहुत कम बैठता है वही समझदारी या सामाजिक दृष्टि मे किया गया प्रेम काफी सफल रहा हैं। हम कह सकते है यह वह अवस्था होती है जब हमारी बुद्धि - विवेक सब जागृत अवस्था में होते हैं । छल कपट आकर्षण को पहचानने लग जाता हैं।

Meaning of true love
What is Meaning of true love 

सच्चे प्यार का अर्थ - सच्चे प्रेम का अर्थ है पावनता लिये निश्छलता लिये, छल कपट आकर्षण से दूर सेवा समर्पण त्याग की भावना को पुष्ट करती हमारी दिन चर्या और हमारा परोउपकारी कर्म सच्चे प्रेम को पुष्ट करता हैं।

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प्रेम एवं आकर्षण में क्या अंतर है ? What is the difference between love and attraction ?

आकर्षण एक ऐसा दरिया है जो अपने मन पसन्द चीज़ों की ओर लुभाता है । जब कोई भी चीज मन को अच्छी लगती है तो हम उनकी ओर आकर्षित हो जाता है । वही Love को दिल की असीम गहराइयों से महसूस किया जाता है । Love और Attraction दोनो अलग अलग है । क्योंकि प्रेम ह्रदय से होता हैं जबकि आकर्षण पसंदीदा चीज़ों की ओर आकर्षित होता है । प्रेम आंतरिक होता है जबकि आकर्षण बाहरी होता है। जैसे सुंदरता । प्रेम मन की आंखों से देखता है जबकि आकर्षण खुली आँखों को लुभाता है । आकर्षण एक लिमिट अवधि तक रहता है जबकि प्यार तो ताउम्र बना रहता है । आकर्षण खत्म प्रेम खत्म और आकर्षण देर सबेर समाप्त होने वाली हमारे मन के भाव हैं।

वर्तमान में प्यार के मायने - In the present sense of love -

आज के आधुनिक युग में प्रेम का रूप स्वरूप सब कुछ बहुत ही बदल गया हैं। इसके मायने बदल गये रंग रूप बदल गये और प्रेम के पावन उदेश्य प्रेम का मुल तत्व सब बदल गये। आज का प्रेम अपने सभी पावन उदेश्यों को खो कर य नया जमाना नया तराना की तर्ज पर अब आगे बड़ रहा हैं। आज प्रेम के किसी भी स्वरूप को परख कर देख ले आपको कुछ कुछ नही बहुत कुछ बदल गया हैं। इतना बदला इतना बदला की प्रेम प्रेम न रहा आज का प्रेम मे वह सब कुछ हैं जो नही होना चाहिये, स्वार्थ, लालच, आकर्षण, रूतबा, धन, सम्पती, पैसा प्रेम के प्रयाय बन गये और जो प्रेम हैं सत्य, निष्ठा, निश्छलता निश्वार्थता पावनता वह सब देखने तक को नहीं मिलती । आज का प्रेम ह्रदय के बजाय दैहिक बनकर रह गया है । what is love.

झूठे प्रेम से कैसे बचा जा सकता है ? How can we avoid false love ? 

सबसे पहले तो हमें सजक सतर्क और चालाक बनना होगा प्रणय निवेदन को समझना होगा क्या यह सचमुच मे प्रेम है ? या मात्र आकर्षण हैं, स्वार्थ है, लालच है, आकर्षण मे व्यक्ति पीछा इतनी आसानी से नही छोड़ता है। और वह सब कुछ कर गुजरने को त्तपर होता है इसके लिये अनुभव की अवश्यक्ता होती है हम अपने बड़े बुजुर्गों से सलाह लेकर इससे बच सकते हैं। स्वार्थी प्रेम अपना स्वार्थ दिखाये बिना नही रह सकता है। थोड़ी सतर्कता से हम स्वार्थी प्रेम को अपनी सुजबुझ से सामने ला सकते। लालची प्रेम को पहचानना इतना मुश्किल नही होता है । लालच उसे गर्त की और ले जाता है थोड़ी सतर्कता से लालची प्रेम की पहचान हो सकती है और हम बच सकते है।

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प्रेम से जुड़े कुछ रोचक तथ्य -

  • जब दो प्रेमी आपस में मिलते है तो दो मिनट पहले दिल की धड़कन तेज हो जाती है ।
  • पहले प्रेम को हमेशा याद रखा जाता है अर्थात भूलने के कोई चांस नहीं ।
  • प्यार होने के बाद दोस्तों से भी खतरा महसूस होता है ।
  • प्यार करने वाले हमेशा एक्टिव होते है यही कारण है कि उनकी याददास्त भी अच्छी होती है ।
  • प्यार होने के बाद जीवन के असली आंनद की अनुभूति होती है । वे हमेशा एक - दूसरे के लिए जीते है ।
  • प्रेम पर पहली कविता चार हजार वर्ष पहले लिखी गई थी ।
  • शादी से पहले प्यार में शारिरिक सम्बंध बनाने से प्रेम में जुदाई का खतरा हो सकता है ।
  • ये दुनिया भी तभी अच्छी लगती है जब प्यार करने वाला साथ हो ।
आशा करते है आज का टॉपिक what is love जरूर पसंद आया होगा । यदि आप कोई राय देना चाहते है तो कमेंट अवश्य करें । ताकि प्रेमियों को सही दिशा मिले ।

कुन्दन पाटिल देवास

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