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कुंडलिनी शक्ति जागृत होने के संकेत या लक्षण

कुंडलिनी शक्ति जागृत होने के संकेत या लक्षण

symptoms of Kundalini awakening

Kundalini shakti एक ऐसी दिव्य शक्ति है जो मनुष्य के शरीर में गुदा के निचले हिस्से में स्तिथ होती है । ये शक्ति सोई हुई अवस्था में होती है । इसे साधना करके जागृत करना होता है । जागृत होने पर कुछ संकेत मिल जाते है । कुछ लक्षण दिखाई देते है जिसे साधक समझ जाता है कि उनकी साधना सफल हुई हैं । Kundalini shakti कुंडलिनी शक्ति को कैसे जागृत करें ? हमारे पिछले लेख में बता चुके है । आज हम What are the symptoms of Kundalini awakening ? के बारे में बताने जा रहे हैं । 

कुंडलिनी एक दिव्य शक्ति के रूप में शरीर में समाहित होती है इसके जागरण पर एक अद्वितिय अनुभव होता है मनुष्य के शरीर में एक रोमांच पैदा हो जाता है उसका शरीर उसके काबू में नहीं रहता अब अनायास ही योगिक क्रियाएं होने लग जाती है कभी ध्यान की मुद्रा में बैठ जाता है तो कभी कुंभक करने लग जाता है अंतर्मन से ऐसा प्रतीत होता है कि वह ईश्वर के समीप हो गया है और जन्म और मृत्यु के चरण से आजाद हो गया आध्यात्मिक चेतना का अनुभव होता है तथा आंतरिक प्रसन्नता का अनुभव भी होता है। जब कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है तब कुछ अनोखे अनुभव प्रतीत होते हैं। सामान्य लक्षण होने पर मूलाधार चक्र में कम्पन या मूलाधार चक्र फड़कने जैसा अनुभव होता है। जैसे उसके भीतर कोई मेढक के समान जीव है जो उछल रहा है।

Sign of kundalini awakening

  • ध्यान मुद्रा में इष्ट देव का दिखना - कुंडलिनी शक्ति जागृत होने के बाद ध्यान मुद्रा में इष्ट देव का के दर्शन होने लग जाते हैं जैसे ही हम ध्यान लगाते हैं वैसे हमारे गुरुदेव या ईष्ट देव के दर्शन होने लग जाते हैं ऐसा प्रतीत होता है कि हम उनके समीप है और ध्यान मुद्रा में हं हं या गर्जना जैसे स्वर अनायास ही निकल पड़ते हैं।
  • एक से अधिक शरीर का अनुभव होन - कुँडलिनी शक्ति जागृत होने के पश्चात एक से अधिक शरीर का अनुभव होने लग जाता है तथा ऐसा लगता है कि एक ही शरीर मे दो लोग मौजूद हैं इसमे मनुष्य बहुत घबरा जाता है और ध्यान आदि करना छोड़ देता है लेकिन यह घबराने का विषय नही बल्कि इसे समझने की आवश्यकता है। मनुष्य के शरीर में तीन प्रकार के शरीर मौजूद हैं स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर । स्थूल शरीर जिसे सभी देख सकते हैंलेकिन सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर का अनुभव सिर्फ कुंडलिनी जागरण के उपरांत ही अनुभव किया जा सकता है।
  • दिव्य ज्योति के दर्शन होना - जब कुंडली शक्ति का जागरण होता है तो हमें अपने ध्यान मुद्रा में एक दिव्य ज्योति पुंज के दर्शन होने लग जाते हैं गाय का अलौकिक अनुभूति का अनुभव होता है ध्यान लगाते वक्त दोनों गांव के बीच एक ज्योति दिखने लग जाती है शरीर में हल्केपन का अनुभव होने लग जाता है।

Kundalini shakti jagrit hone ke sankat 

  • शक्तिपात होना - कुंडलिनी शक्ति जागरण के बाद जब ध्यान की मुद्रा में मनुष्य बैठता है तो उसे ऐसा प्रतीत होने लग जाता है कि जैसे उसके शरीर मे आकाश से कोई शक्ति उसके शरीर में समा रही है तथा शक्ति या उर्जा का भंडार उसके शरीर के अंदर समा रहा है या प्रवेश कर रहा है और उसका शरीर बहुत ही हल्का हो जाता है ऊर्जा के भंडार को मनुष्य अंतर्मन से महसूस कर सकता है कुंडलिनी शक्ति के जागरण के बाद ऐसा प्रतीत होने लग जाता है जिसमें आत्मा और शरीर का भेदभाव खत्म हो जाता है। रेकी विधि में जब भी ध्यान की मुद्रा में कुंडली जागरण के बाद बिठाया जाता है तो आप अपने आभा को अपने दोनों हाथों से महसूस कर सकते हैं तथा दोनों हाथों को आकाश की ओर रखकर यह महसूस किया जा सकता है कि प्राकृतिक शक्ति हमारे अंदर समा रही है।
  • ईश्वर के ज्योति पुंज के दर्शन होना - कुंडलिनी जागरण के उपरांत ध्यान मुद्रा में बैठने के बाद ईश्वर के ज्योतिपुंज के दर्शन होने लग जाते हैं। ऐसा लगता है ईश्वर साक्षात हमारे सामने उपस्थित है और हम उनसे बातें कर सकते हैं उन्हें महसूस कर सकते हैं और उन्हें देख सकते हैं।

आशा करते है आज का लेख पसंद आया होगा । यदि आप कोई कुंडलिनी शक्ति से जुड़ी कोई जानकारी देना चाहते है तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बताए ।

मोनिका गुप्ता

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