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Nada yoga क्या है, परिभाषा, प्रकार एवं फायदे

Nada yoga क्या है, परिभाषा, प्रकार एवं फायदे


Nada yoga kya hai.


Sahitydrshan में आप सभी का स्वागत है । योग हमारे जीवन की दिनचर्या का एक हिस्सा है । योग से केवल सेहत तंदुरुस्त होती है बल्कि आत्मा की संतुष्टि का अहम मार्ग है । योग साधना से ईश से मिलन भी सम्भव है । इन योगों में Nada yoga भी एक है । नाद योग से भीतर की आवाज सुन सकते है । नाद योग के बहुत सारे फायदे हैं । Nada yoga को एकांत स्थान में बैठकर किया जा सकता है तो चलिए जानते है Nada yoga kya hai, नाद योग कैसे करें  -


नाद योग क्या है ? Nada yoga kya hai ?

आध्यायतम के रास्ते पर चलने पर किसी मनुष्य के द्वारा मन, चित्त, बुद्धि को एकाग्रचित करके सूरत को दोनों आँखों के बीच रखने पर बाहरी शोर के अलावा जो आवाज़ सुनाई दे, उसे नाद कहते है शुरुआती समय में थोड़ा मुश्किल लगता है लेकिन इसके निरंतर प्रयास करने पर यह बहुत सरल हो जाता है जब सुरत को एकाग्रचित करके दोनों आँखों के बीच रखकर कानो में दोनों उंगलियां डालकर (बाहर का शोर कम सुनाई दे ) मन को और शरीर के समस्त क्रियाकलाप को शून्य करके घट से आने वाली सभी आवाजों को सुनने का प्रयास करते है शुरुआत में बहुत सी आवाज़ सुनाई देती है मन भी बार बार सांसारिक साधनों में भागता है लेकिन निरंतर प्रयास के बाद हमारे कानो में घट से आने वाली एक ही आवाज़ ही सुनाई देती है और मन भी स्थिर हो जाता है ऐसे करने वाले योगी महात्मा विरले ही होते है ।


नाद योग की परिभाषा ? What is nada yoga in hindi. 

इस मानव रूपी शरीर में हज़ारो शंख, घंटा, घड़ियाल, ढोलक की आवाजे निरंतर आ रही है उसे जिस योग की सहायता से सुना जाता है उसे नाद योग कहते है ।


नाद योग के प्रकार ? Type of nada yoga

  • आनहत - ऐसी आवाज़ जो एकाग्र होने पर सुनाई दे, यह घट से आने वाली आवाज़ होती है जो नाद योग से सुनाई देती है ।
  • आहत - जिसे पैदा किया जा सके, जैसे -चलने की आवाज़, कोई मशीन की आवाज़ आदि ।
  • पारा - आध्यात्मिक आवाज़ जिसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है इसे उच्च चेतना की स्थिति में सुना जा सकता है ।
  • पश्चियंती - यह बोद्धिक चेतना की आवाज़ होती है ।
  • माध्यमा - यह सांस से उत्पन्न होने वाली ध्वनि होती है ।
  • व्हीख़री - जो ध्वनि कानो से सुनाई देने योग्य होती है ।
  • भजन - मन को एकाग्र करके दोनों आँखों के बीच सुरत को लगाना और घट से आने वाली आवाजों को सुनना, भजन कहलाता है ।


नाद योग के फायदे ? Benefits of nada yoga
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  • चिंता और अवसाद कम करना - Nada yoga करने से मन एकाग्र होता है, जिस से मनुष्य को चिंता और अवसाद की  स्थिति में काफ़ी सहायता मिलती है ।
  • यादाश्त बढ़ाना - जब मन को बार बार एक और लगाते है तब मनुष्य को यादाश्त बढ़ाने में मदद मिलती है इस अवस्था में नाद योग बहुत सहायक होता है ।
  • इस माया रूपी संसार में जीते जी मालिक को पाना, ये सब योगियों द्वारा किया जाता है, संसार में ऐसे विरले ही होते है ।
  • इम्युनिटी सिस्टम के लिए - नाद योग के ज़रिये इम्युनिटी सिस्टम बेहतर करने मे मदद मिलती है, और ब्लड सर्कुलर भी अच्छा रहता है ।
  •  ह्रदय के लिए - नाद योग करने से ह्रदय ठीक से काम करता है, इसके अलावा और भी कई बीमारियों में मदद मिलती है जैसे - ब्लड प्रेसर, अस्थमा आदि ।
  •  बेहतर नींद के लिए - नाद योग करने से, स्वास्थ्य ठीक रहता है, और नींद भी अच्छी आती है ।
  • तनाव कम करने के लिए - नाद योग करने से मन शांत रहता है और तनाव कम होता है मनुष्य को क्रोध भी कम आता है ।

Nada-yoga-kaise-kare.


नाद योग कैसे करे ? Nada yoga kaise kare.

  •  सबसे पहले पैरों को क्रॉस बनाकर एकांत में बैठे ।
  •  सर पर कोई कपड़ा रखे ।
  •  दोनों हाथों की उंगलियां कानो में डाले या रुई डाल सकते है ।
  •  कमर सीधी रखे ।
  •  सुरत को लगाना, आँखों के बीच की जगह पर ध्यान को केंद्रित करे ।


नाद योग करने का तरीका - Nada yoga karane ka tarika -

Nada yoga को अच्छे से करने के लिए सबसे पहले एकांत स्थान का चयन करें । नियमित रूप से करने के लिए सुबह - शाम का समय निर्धारित करें । सर पर कोई कपड़ा रखकर, सुरत को एकाग्र करके, कानो में दोनों उंगलियां डाल करके, बाहरी शोर को हटाकर, काफ़ी टाइम बाद कुछ शोर सुनाई देगा, वो मन मंदिर के आध्यात्मिक आवाज़ होती है ।


नाद योग करने के टिप्स - Nada yoga tips in hindi. 

  • ज्यादा लम्बा टाइम ना ले 10 मिनट काफ़ी है ।
  • सुबह का टाइम रखे ।
  • एकांत जगह बैठे ।
  • कोशिस करे मन को एकाग्र करने का ।
  • कोशिस करे बाहरी सांसारिक गतिविधियों में मन ज्यादा ना जा पाए ।
  • योग की मुद्रा में बैठे ।


नाद योग करने में सावधानी -

  •   एकांत जगह पर बैठे ।
  •   शोरगुल ना हो ।
  •   किसी को कमर और घुटनों में परेशानी हो तो ना करे ।
  •   आसपास बच्चे ना हो ।
  •   सर पर कपड़ा जरूर रखे ।
  •   व्यवस्तित ढंग से योग की मुद्रा में बैठे ।
  •   नाद योग करते समय बीच में बोले नहीं, और ना ही आँखों को खोले । 


FAQ


1. नाद कितने प्रकार के होते है ?
जबाब - नाद के बिना संगीत, स्वर, राग आदि कुछ भी संभव नहीं है ज्ञान भी इसके बिना अधूरा है । नाद 3 प्रकार का माना गया है - 
1. प्राणिभव - आनन्दादि (परम सुख ) अंगों से उत्पन्न किया जाता है ।
2. अप्राणिभव - जो स्वर वीणा से निकलता है ।
3. उभयसंभव - जो बांसुरी से निकलता है ।

2. नादानुसन्धान क्या है ?
जबाब - ध्यान से पूर्व साधक के द्वारा किया जाने वाला अभ्यास, इसका उद्देश्य आनहत नाद को सुनना है, यह अंतयाराम सहायक है ।

3. नाद साधना कैसे करें ?
जबाब - शरीर को ध्यान की मुद्रा में रखकर मन को स्थिर करके, सांसारिक क्रियाओ को आराम देकर, दोनों कानो में ऊँगली डालकर सुरत को दोनों आँखों के बीच में रखते है और बाहर से आने वाली ध्वनियों को छोड़कर घट से आने वाली ध्वनि को पकड़ते है । शुरुआती दौर में मध्यम और अंत मे प्रबल सुनाई पड़ेगी । 

4. संगीत से नाद तक की यात्रा को क्या कहते है ?
जबाब - भारत में राजा भरत के समय तक गान को पहले केवल गीत कहते थे, वाद्द में जहाँ गीत नहीं होता था, केवल दाडा, दिडदिड जैसे शुद्ध अक्षर होते थे, जिसे निर्मित या बहिर्गीत कहा जाता था, और उसमे नृत्य की एक अलग कला विकसित थी ।

5. नाद योग की विशेषता ?
जबाब - नाद योग की 3 प्रमुख विशेषता होती है -
1. तारता
2. तीव्रता
3. गुण 

6. नाद सिद्ध साधना कैसे प्राप्त करें ?
जबाब - जब मन का ध्यान बाहरी चीज़ों से हटाकर केवल भीतर की बात सुनने में लगा दिया जाता है तो परम् शांति की अनुभूति होती है । एक बार शांति के लिए भीतर की ध्वनि के प्रति मन को आकर्षित करना है बाकी नाद धीरे धीरे स्वत् अपनी ओर खींच लेगा ।

7. जो नाद स्वयं उत्पन्न हो उसे उसे क्या कहेंगे ?
जबाब - नाद के दो भेदों में अनाहत एवं आहत जो कि देह में प्रकट होते है । समाधि, उपासना से परमानंद की अनुभूति करते है । उसे अनाहत नाद कहते है जबकि ग़ज़ घर्षण से उत्पन्न आहत नाद कहा जाता है ।

8. नाद शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ?
जबाब - शास्त्रों के अनुसार नाद की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई । जैसे शिवनाद, शंखनाद । और यही ध्वनि मानव सभ्यता में नाद की उत्पत्ति का कारण बनी । फिर नाद से संगीत बना । संगीत एक ऐसी कला है जिसे गाने से शांति का आभास होता है ।


अपने विचार - Nada yoga -

नाद योग आध्यातम का ऐसा तरीका है जिस से मनुष्य इस माया रूपी संसार में रहते हुए, भी मालिक को पा सकता है । उसके दर्शन कर सकता है, और अपने आप को इस भवसागर से पार कर सकता है ये प्रभु को पाने का वो सरळतम तरीका है जिस से मनुष्य सांसारिक जीवन जीते हुए कर सकता है, इसमें सन्यासी होने की की जरुरत नहीं है, मगर nada yoga निरंतर करना है ।। सोनू सैनी दौसा, राजस्थान ।।


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