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Diwali Rangoli Design. दीवाली पर रंगोली कैसे बनाते है ।

Diwali Rangoli Design. दीवाली पर रंगोली कैसे बनाते है ।  



Diwali Rangoli Design.


Diwali Rangoli Design. दिवाली दीपों का उत्सव है। दिवाली श्रृखलाओं का त्यौहार है अपने साथ बहुत सारे त्योहारों को लेकर के आती है दीपावली हिंदुओं का मुख्य त्यौहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को आता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार बताया जाता है कि भगवान राम 14 वर्ष वनवास के पूरे कर अयोध्या आए थे और उन्हीं के आने की खुशी में अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया था। 

उसी दिन से दीपावली का त्यौहार हर्ष और उल्लास के साथ में मनाया जाने लगा। दिवाली पर घरों में मांडना मांडने से हमारी खुशियों का आगमन होता है । माता लक्ष्मी मां रंगोली देखकर प्रसन्न होती है और हमारे घरों में आती हैं । हमें धन धान्य से परिपूर्ण करती है । घर में खुशहाली आती है । ऐसा रंगोली के प्रति प्राचीन मान्यता रही है।

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रंगोली क्या है ? Rangoli kya hai -

 रंगोली एक ऐसी आकृति है। जिसे सूखे या गीले रंगों से अथवा फूलों की पंखुड़ियों से बनाई जाती है । विशेष पर्व पर विशेष आकृति में रंगोली बनाने का हमारे भारत देश में चलान है । यह प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है । राजस्थान में इसे माँडना ( Diwali rangoli design ) भी कहते हैं। जिसे गेरू और चूने से बनाते हैं ।

गेरू से लाल रंग और चूने से सफेद रंग होता है। बहुत सुंदर दिखाई देते हैं। इतनी बड़ी-बड़ी रंगोलियां बनाते हैं। मन से बनाते हैं । उसमें मन से रंग भरते है। बहुत सुंदर लगते हैं। घर में खुशहाली नजर आती है।


रंगोली क्यों सजाते हैं ? Achchi achchi rangoli kyo banate hai -

एक पौराणिक प्रथा है। भगवान राम 14 वर्ष वन में व्यतीत कर रावण पर विजय पाकर अयोध्या नगरी आए थे । सभी ग्राम वासियों ने भगवान का स्वागत  किया था। सभी अयोध्या वासियों ने नगर को सजाया और अपने घर आंगन को रंगोली से सजाया। तभी से दीपावली पर रंगोली बनाने की पता चली आ रही है कोई भी त्यौहार क्यों ना हो बिना संतों के नहीं मनाया जाता ऐसा नहीं है कि हम केवल होली पर ही इल्जाम लगाते हैं।

हमारे हिंदू धर्म के जितने भी तो सभी को रंगों से सजाया जाता है जितने रंगों से रंगोली सजाई जाती है । उतने ही मन में रंग भरे हुए होते हैं और होली कर कर के बाहर रंगोली का रूप धारण कर लेते हैं।


रंगोली कितने प्रकार की होती है | Type of Rangoli -

रंगोली कई प्रकार की होती है । मुख्यतः तीन प्रकार से बनाई जाती है -

1. सूखे रंगों के माध्यम से |

2. गीले रंगों के माध्यम से |

3. फूलों की पत्तियों के माध्यम से |

4. रेडीमेड बाजार में बने हुए स्टीकर रंगोली के मिलते हैं जिन्हें हम निकाल कर के फर्श पर या दीवार पर चिपका सकते हैं। स्टीकर लंबे समय तक फर्श पर चिपके रहते हैं । दीवार पर चिपके रहते हैं। इनकी फिनिशिंग ज त्यों बनी रहती है लेकिन अपने हाथों से बनाई हुई रंगोली की बात ही निराली होती है वह हमें मन में खुशहाली भर्ती है ।


दीवाली पर रंगोली कैसे सजाएँ | Rangoli kaise banate hain -

दिवाली पर या किसी भी त्योहार पर हम रंगोली से अपने घर आंगन, द्वार सजाते हैं । विशेष त्योहार पर विशेष रंगोली बनाते हैं। दीपावली पर हम रंगोली में दीया बना सकते हैं या शुभ - लाभ लिख कर या बीच में स्वास्तिक का निशान बनाकर  रंगोली सजाते ( Diwali Rangoli Design ) है । दोनों तरफ कलश और उसके बीच में स्वास्तिक का निशान बना कर के हम रंगोली बनाते हैं । रंगोली की बाहरी लाइन जो होती है वह हम सफेद रंग से  बनाते हैं । उसकी बाद डिजाइन पूरा बना करके उसमें हम अलग-अलग रंग भरते हैं। ग्लिटर रंग भी बाजार में आते हैं । ग्लिटर कलर पाउडर आता है। ग्लिटर पाउडर जगह जगह बिखेरने से  हमारी रंगोली में चार चांद लग जाते हैं। हम गोल, चोकोर काँच का भी प्रयोग कर सकते हैं।


Rangoli kaise banate hain.


रंगोली बनाने की विधि | Diwali ki Design

Diwali Rangoli Design. प्राचीन युग में चावल को भिगो करके उन्हें पीसकर दो भागों में चावल के पेस्ट को बाँट लेते थे। चावल में हल्दी मिला ली जाती थी और आधी को सफेद रखा जाता था । इस तरह से  रंग तैयार करके रंगोली में रंग भरते थे । जमीन को गेरू या गोबर से लीप करके और फिर चावल के  मांडने बनाए जाते थे। 

यह मंडेने जब तक चलते थे ,जब तक इन पर पानी नहीं डाला जाता था और पहले की लोग दाल चावल अलग-अलग कलर की दालों को लेकर के चाॅक से आकृति बनाकर के उसमें दाल, चावल, गेहूँ भर के भी रंगोली बनाया करते थे।

अब रंगोली का थोड़ा सा प्रारूप बदल गया है जिन्हें हम सूखे रंगों से बनाते हैं या गीले रंगों का प्रयोग करते हैं । यदि रंगोली लम्बे समय तक रखनी है या हमेशा के लिए रखनी है वह रंगोली में ऑयल पेंट का प्रयोग करके रंगोली को काफी समय तक जीवित रख सकते हैं।

अंतिम शब्द - Diwali Rangoli Design रंगोली बनानी चाहिए मन मस्तिष्क क्रिएटिव रहता है नई-नई कलाओं का मन में आगमन होता है एक विशेष खुशी मिलती है जैसा कि मैंने देखा गुजरात में नवरात्रों में माता के आने रूपों की रंगोली चित्र बनाकर के प्रदर्शित की जाती है जन्माष्टमी पर देखिए कृष्ण भगवान की अनेका अनेक रूप कहीं देखे तो बांसुरी उस पर आप देखिए मोर पंख बना हुआ ऐसा प्रतीत होता है ।

 मानो कि यह वास्तविकता में ऐसा ही है ऐसा नहीं लगता कि रंगोली बनी हुई है वह सब कुछ जीवन से नजर आता है यह कलाकार की कलाकार एक अच्छा स्रोत है देखिए अब दिवाली पर भी आप देखेंगे कि अलग-अलग तरह के सब अपने-अपने मनभाव के अनुसार रंगोली बनाई और जो जितना मन से कार्य करता है उस कार्य में उतनी ही अधिक सुंदरता पाई जाती है ।। आभा मिश्रा ।।

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