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पेटेंट रजिस्ट्रेशन कैसे करें । Patent registration in india.

पेटेंट रजिस्ट्रेशन कैसे करें ।  Patent registration in india 


Patent registration in india.


Patent registration kaise kare. पेटेंट का हिंदी अर्थ एकस्व के रूप में लिया जाता है । बौद्धिक संपदा के विषय क्षेत्र में पेटेंट का सबसे अहम स्थान हैं। जब भी कोई व्यक्ति नया अविष्कार करता हैं चाहे वो वस्तु हो या अन्य उत्पाद । उसके अविष्कार पर सिर्फ उसका ही अधिकार रहे । ताकि उनकी कोई नकल न करे । अपने अविष्कार पर एकाधिकार प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने नाम से पंजीयन कराना पड़ता हैं। 

पेटेंट एक अविष्कारक की बौद्धिक संपदा हैं क्योकि उन्होंने बुद्धि पूंजी व श्रम द्वारा नए अविष्कार की खोज की जाती हैं। Patent registration करने से बौद्धिक संपदा पर एकाधिकार प्राप्त हो जाता हैं। पेटेंट अधिनियम 1970 माना जाता हैं। जिसके अंर्तगत कोई भी अविष्कार कर्ता अपनी बौद्धिक संपदा को रजिस्टर करवा सकता है । भारत में Patent registration कार्यालय बौद्धिक संपदा भवन नई दिल्ली में स्थित है ।

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पेटेंट क्या है । What is patent in hindi -

Patent kya hai. पेटेंट एक ऐसा अधिकार है जिसके तहत किसी भी नयी खोज से बनने वाले प्रोडक्ट पर उसके खोजकर्ता को कानूनी रूप से सरकार द्वारा एकाधिकार दिया जाता है। एक बार पेटेंट मिल जाने के बाद उस उत्पाद को एक निश्चित अवधि ( 20 साल ) तक कोई दूसरा न तो उस प्रोडक्ट को बना सकता है और न ही मार्केट में बेच सकता है। लेकिन अगर कोई अन्य व्यक्ति उस पेटेंट किये हुए प्रोडक्ट को बनाना चाहे तो उसे लाइसेंस लेना पड़ता है और उसकी रॉयल्टी देनी पड़ती हैं।

पेटेंट की अवधि 20 साल की निर्धारित की गई है। इस अवधि के बाद पुनः नवीनीकरण करवाना पड़ता है । Patent registration करने के बाद अविष्कारक को ये अधिकार यह हैं कि वो अपना ये अधिकार बेचे या किसी को भी हस्ताक्षरित कर सके।

किसी वस्तु के आविष्कार के अलावा किसी प्रोसेस का भी Patent registration कराया जा सकता है यानी ऐसा को प्रोसेस जिसका सम्बन्ध किसी नयी तकनीक या किसी उत्पाद बनाने की विधि से है। लेकिन ध्यान रखें कि ये पेटेंट का ये आदेश देश की सीमाओं के अंदर ही लागू माना जाता है। पेटेंट का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान कार्य, प्रौद्योगिकी एवं उद्धोगो में होने वाली उन्नति को प्रोत्साहन देकर आगे बढ़ना हैं।

पेटेंट का अधिकार अविष्कारक को आविष्कारों के लिए दिया जाता है। यहाँ आविष्कार का अर्थ उस प्रोडक्ट या प्रक्रिया से है जो कि देश के औद्योगिक उपयोजन (Industrial application) के उपयुक्त हो। अविष्कार नया एवं उपयोगी होने के साथ साथ उस दौर की टेक्नोलॉजी की जानकारी रखने वाला होना चाहिए। 

आविष्कार को भारत के पेटेंट अधिनियम की धारा 3 के प्रकाश में भी देखा जाना चाहिये। यह धारा परिभाषित करती है कि आविष्कार किन्हें नहीं माना जाता हैं। किसी बात को आविष्कार तब तक नहीं कहा जा सकता है जब तक वह नया न हो। यदि किसी बात का पूर्वानुमान किसी प्रकाशित दस्तावेज के द्वारा किया जा सकता था या Patent application प्रस्तुत करने के पूर्व में कही और प्रयोग किया जा चुका हैं तो इसे नवीन अविष्कार नहीं माना जा सकता। 

यदि कोई बात सार्वजनिक क्षेत्र में है या पूर्व की कला के भाग के रूप में उपलब्ध है तो उसे भी आविष्कार नहीं कहा जा सकता। भारत देश में परमाणु उर्जा से सम्बन्धित आविष्कारों का पेटेंट नहीं कराया जा सकता है। ऐसे अविष्कार जो लोक व्यवस्था, नैतिकता, मानव प्राणी, पशु,वनस्पति, स्वास्थ्य व पर्यावरण के अंतर्गत हो उसे अविष्कार नही कहां जा सकता।


पेटेंट कितने प्रकार के होते है | Type of patent in hindi.


1. यूटिलिटी पेटेंट - ये पेटेंट औद्योगिक विकास के लिए है जैसे प्रोसेस, मशीन, प्रोडक्ट का कच्चा माल, किसी प्रोडक्ट का कम्पोज़िशन या इनमें से किसी में भी सुधार को सुरक्षित रखता है। जैसे- मेडिसिन, फाइबर, कंप्यूटर हार्डवेयर एवं ऑप्टिक्स आदि।


2. डिजाइन पेटेंट – इस पेटेंट के अंतर्गत  वस्तु के नए, ओरिजिनल और डिजाइन के गैर कानूनी इस्तेमाल को रोकता है। जैसे- कार्टून करेक्टर, एथलेटिक शूज का डिजाइन, जिन्हें पेटेंट से सुरक्षित रखा जाता है।


3. प्लांट पेटेंट – इस पेटेंट का सम्बंध कृषि से यानी नए तरीके से तैयार की गयी पेड़-पौधों की नई किस्मों को सुरक्षित करने के लिए ये पेटेंट किया जाता है। जैसे- उदाहरण के लिए सिल्वर क्वीन भुट्टा प्लांट, बेटर बॉय टमाटर एवं हाइब्रिड गुलाब आदि ।


ऐसे आविष्कार का Patent registration कराया जा सकता है जो  बिल्कुल नया हो या अनोखा हो । सबसे अलग और उपयोगी होना भी आवश्यक है जबकि प्रकृति के द्वारा प्राप्त जैसे हवा और गुरुत्वाकर्षण, मिट्टी और पानी जैसी प्राकृतिक चीज़ों या किसी भाववाचक आइडिया का पेटेंट नहीं कराया जा सकता हैं।


पेटेंट रजिस्ट्रेशन कैसे करें । How to patent registration in India -

पेटेंट के लिए वास्तविक अविष्कारक अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकता हैं या उसके द्वारा निर्धारित व्यक्ति भी आवेदन से सकता हैं। यदि अविष्कारक की मृत्यु हो गई हैं तो उसका विधिक प्रतिनिधि आवेदन दे सकता हैं। आवेदनपत्र में तिथि, कार्यालय का नाम, प्रस्तुत करने वाले के अधिकार का प्रमाण पत्र लगाना पड़ता हैं। 

सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ पेटेंट कार्यालय में आवेदन दिया जाता हैं। आवेदन प्राप्ति पर पेटेंट कार्यालय द्वारा आवेदन की जांच करके उसे प्रकाशित किया जाता हैं व जनता के लिए खोल दिया जाता हैं जिससे उसकी प्रमाणिकता की जांच भी जाती हैं।


Patent registration process.


पेटेंट रेजिस्ट्रेशन प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेज । patent registration Process and documents -

आपके Patent registration करने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत होती है जो इस प्रकार से है -


फॉर्म -1 में पेटेंट आवेदन

पेटेंट के आवेदन को दर्ज करने का अधिकार का प्रमाण। यह प्रमाण या तो आवेदन के अंत में या इसके साथ संलग्न किया जा सकता है। यदि पूर्ण विनिर्देश उपलब्ध नहीं हैं, तो अनंतिम विनिर्देशन। अनंतिम विनिर्देशों के मामले में, फिर 12 महीने के भीतर फॉर्म -2 में पूर्ण विनिर्देशन।

फॉर्म -3 (यदि लागू हो) में सेक्शन -8 के तहत स्टेटमेंट और अंडरटेकिंग। यदि पेटेंट आवेदन पेटेंट एजेंट द्वारा दायर किया जाता है, तो फॉर्म -26 में प्राधिकरण की शक्ति।


यदि आपके आवेदन जैविक सामग्री के लिए है, तो आपको Patent registration देने से पूर्व राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की अनुमति लेना अनिवार्य है।


● नवप्रवर्तन में प्रयुक्त जैविक सामग्री के मामले में भौगोलिक उत्पत्ति के स्रोत को भी शामिल किया जाना चाहिए।

● सभी आवेदनों में आवेदक / अधिकृत व्यक्ति / पेटेंट वकील के हस्ताक्षर होने चाहिए।

● पूर्ण / अंतिम विनिर्देश के अंतिम पृष्ठ पर आवेदक / एजेंट द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए। ड्राइंग शीट के दाहिने निचले कोने पर साइन सहित।

● आवेदन प्रस्तुत करने के बाद एग्जाम की प्रक्रिया के बाद उनका पेटेंट प्रकाशित कर दिया जाता है ।


पेटेंट रजिस्टर्ड शुल्क कितना  है ? Patent registration fees -

 Patent registration fees दो प्रकार से अदा की जाती है जो इस प्रकार से है -

• अनंतिम पेटेंट के लिए रु . 27249  के बाद (परिवर्तनीय)

• स्थायी पेटेंट के लिए रु. 44,999 (परिवर्तनीय) । यह शुल्क आप बैंक चेक या डिमांड ड्राफ्ट से पेय कर सकते है । ध्यान रखें कि दी गई शुल्क वापस देय नहीं होगी । 


पेटेंट पंजीकरण के लाभ । Benefits of patent registration -

  • Patent registration के बाद अविष्कार कर्ता  को उस बौद्धिक संपदा का स्वामित्व प्रदान किया जाता है । 
  • पेटेंट पंजीकरण कराने के बाद आपके राजस्व में इजाफा होता है । क्योंकि इसे अन्य रूपो जैसे लाइसेंस देना व बेचना सम्भव है ।
  • एक मुश्त बिक्री होने अविष्कारक को 5% रॉयल्टी भी मिल सकती है ।
  • पेटेंट रेजिस्ट्रेशन के बाद समस्त अधिकार अविष्कार कर्ता के पास सुरक्षित होते है । 
  • पेटेंट रजिस्टर के उपरांत अविष्कार की लोकप्रियता बढ़ जाती है और भरोसेमंद भी माना जाता है ।


कॉपीराइट व पेटेंट में अंतर बताइए | copyright vs patent registration -

कॉपीराइट व पेटेंट में अंतर को निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता हैं।

  • कॉपीराइट लेखक द्वारा लिखी गई रचना या नाटिका, बनाया गया कोई विशेष फोटों, कोई फ़िल्म या गाये गए गाने के स्वामी को प्रदान किया गया अधिकार होता हैं। जबकि पेटेंट  किसी नवीन उत्पाद या नवाचार द्वारा किसी अविष्कार के लिए उसके अविष्कारक को प्रदान किया गया अधिकार हैं।
  • कॉपीराइट स्वामी की स्वयं की कृति या रचना या निर्मित चित्र व संगीत प्रस्तुतिकरण पर मिलता हैं। जबकि पेटेंट किसी स्वामी के द्वारा किये गए नए अविष्कार या नए उत्पाद पर मिलता हैं।
  • कॉपीराइट  के अंतर्गत रचना के लेखक को यह अधिकार मिल जाता हैं कि उसकी अनुमति के बिना उसकी सामग्रियों का उपयोग कोई दूसरा व्यक्ति नही कर सकता। यह एक अपराध की श्रेणी में आता हैं। पेटेंट के अंतर्गत अविष्कारक को अपने अविष्कार का उपयोग दूसरे व्यक्ति को देने की अनुमति प्रदान की जा सकती हैं।
  • कॉपीराइट के अधिकार की अवधि जीवन भर एवं उसके 60 वर्ष बाद तक होती हैं। वहीं पेटेंट की अवधि पंजीयन की तिथि से 20 वर्ष तक होती हैं।

उम्मीद करते है आज का टॉपिक How to patent registration in India in hindi आपको जरूर पसंद आया होगा । आप अपने विचार कमेंट बॉक्स में लिखे ।। कपिल दुबे ।।


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