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आजादी का अमृत महोत्सव पर निबंध । Azadi ka Amrit Mahotsav Essay in hindi.

आजादी का अमृत महोत्सव पर निबंध । Azadi ka Amrit Mahotsav Essay in hindi.


Azadi ka Amrit Mahotsav Essay in hindi.


Azadi ka Amrit Mahotsav Essay in hindi. जैसा कि हम सभी जानते है कि भारत लम्बे समय तक गुलाम रहा था । ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के बाद धीरे धीरे भारत अंग्रेजों के अधीन होता गया और अगले 50 साल में भारत के सभी राजाओं ने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार कर ली और भारत में अंग्रेजी शासन स्थापित हो गया । 

लेकिन भारतीयों को अंग्रेजी शासन व्यवस्था बिल्कुल ही मंजूर नहीं था और धीरे धीरे अंग्रेजी शासन से खिलाफत शूरु हो गई । औऱ 1857 की क्रांति का आगाज़ हुआ । उस विद्रोह का परिणाम 1947 को मिला । इसी बीच कई स्वतंत्रता सेनानियों को अपनी आहुति देनी पड़ी । 

भारतीयों क्रांतिकारियों क्रूर अंग्रेजों की अनेकों कठोर यातनाएं सहन करनी पड़ी । अनेकों आंदोलन चलाए गए । शक्तिशाली अंग्रेजों ने कुछ आंदोलन को सफल होने नहीं दिया और अल्प अवधि में समाप्त कर दिए गए । अंत में महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन का आगाज़ किया  । और फिर 15 अगस्त 1947 के दिन आजादी का सूरज उदय हुआ । 

उस दिन आज तक 15 अगस्त को आजादी का उत्सव मनाकर उन सभी वीर शहीदों का स्मरण किया जाता रहा है । मगर केंद्र सरकार ने साल 2021 में 75वे आजादी के उत्सव पर आज़ादी का अमृत महोत्सव की शुरुआत की है । जो लगातार 2023 तक चलेगा । इस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि Aazadi ka Amrit Mahotsav का मुख्य उद्देश्य आजादी के वीरो की गाथाएं बच्चों को सुनाने के साथ साथ स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद स्थिति पर चर्चाएं होगी । तो चलिए जानते है जानते है Azadi ka amrit mahotsav essay in hindi.

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आज़ादी के अमृत महोत्सव का अर्थ | Azadi ka amrit mahotsav kya hai.

आज़ादी का अमृत महोत्सव का अर्थ नए विचारों का अमृत है । Azadi ka Amrit mahotsav एक ऐसा महाउत्सव है जिनका अर्थ की स्वतंत्रता की ऊर्जा का अमृत है । मतलब कि क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों, देशभक्तों की स्वाधीनता का ऐसा अमृत है जो कि हमे सदैव देश के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है । हमारे मन में नए विचारों, नए संकल्पो की क्रांति लाता है । 

आजादी के महोत्सव का उद्देश्य | azadi ka amrit mahotsav ka uddeshy.

आजादी का महोत्सव का उद्देश्य देशभर में एक अभियान चलाकर देशभक्ति भावनाओ का प्रसार करना है । गुमनाम शहीदों की गाथाएं जन जन तक पहुँचाना है । प्रत्येक विभाग अपने कार्यक्रमो की रूपरेखा तैयार करके कार्यक्रम का आयोजन करेगा । जिसमे में अब तक की उपलब्धियों का प्रसार प्रचार करेगा ।

Aazadi ka Amrit mahotsav का उद्देश्य भारत को देशभक्ति रंगों से रंगना है । इस अभियान के तहत स्कूलों में, कार्यलयों में कार्यक्रम जैसे खेल, गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पोस्टर, बैनर के माध्यम देशभक्ति भावनाओ का प्रचारित करना है ।

आजादी का अमृत महोत्सव कब से कब तक मनाया जाएगा ?

एक महाअभियान के रूप में आजादी के 75 साल पूरे होने पर साबरमती आश्रम से अमृत महोत्सव की शुरुआत 12 मार्च 2021 से हुई । जिसके तहत पहला अमृत महोत्सव 15 अगस्त 2021 को मनाया गया है । इस महोत्सव को लेकर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए । इसी प्रकार यह कार्यक्रम वर्ष 2023 तक चलेगा । 

आजादी का अमृत महोत्सव का अंतिम  कार्यक्रम  15 अगस्त 2023 को मनाया जाएगा । चुकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि यह कार्यक्रम हर 25 साल के अंतराल में मनाया जाएगा ।  

आजादी की कहानी करीब से नहीं जान पाए क्योंकि आमतौर पर पुस्तको में पढ़ने को मिलती है । उसे गहराई से जानने के लिए, देर से मिली आजादी को महसूस करने के लिए इस प्रकार से Azadi ka amrit mahotsav का आयोजन बहुत आवश्यक है । ताकि युवा पीढ़ी के दिलो दिमाग पर देशप्रेम की भावनाओं का संचार हो । अपने देश की स्थिति एवं तरक्की के बारे में अच्छे से जान सकते है । इनके लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम सबसे अहम भूमिका निभाते हैं । यही कारण है कि इस अभियान में कार्यक्रमों की लंबी चौड़ी सूची है । 

Azadi ka mahotsav 1857 se 1947 tak.



आजादी का अमृत महोत्सव 1857 से 1947 तक | Azadi ka mahotsav 1857 se 1947 tak.

अंग्रेजों की लम्बे समय तक गुलामी का दंश झेल रहे भारतीयों के मन में आजादी के विचारों को जन्म दिया है । इस विचार को फलीभूत करने के लिए भारतीयों ने अनेकों लड़ाइयां लड़ी । जिनकी शुरुआत सन 1857 से हुई जो लगातार 1947 तक चलती रही । इसी बीच कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी । तो चलिए जानते है 1857 से 1947 तक की प्रमुख घटनाएं जो Azadi ke amrit mahotsav का कारक बनी ।

सन 1857 का स्वतंत्रता संग्राम

Azadi ka Amrit mahotsav कोई नया नहीं है । इनकी शुरुआत सन 1857 में क्रांति के रूप में हो चुकी थी । यह भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम था जो देश की आजादी के लिए लड़ा गया था । भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए किया प्रथम प्रयास था । हालांकि यह प्रयास असफल रहा था लेकिन एक नए जुनून के बीज बो दिये ।

Azadi ka amrit mahotsav essay in hindi.

सन 1885 में कांग्रेस की स्थापना

आजादी की लड़ाई लड़ रहे भारतीयों ने अनेकों संगठनों की स्थापना की ताकि सभी लोग एकत्रित होकर अपने लक्ष्य की प्राप्ति करें । इसी क्रम में सुरेंद्र नाथ बैनर्जी ने सन 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य मध्यम वर्ग के शिक्षित भारतीयों के विचारों को आगे लाकर आजादी की क्रांति लाना था। कलकत्ता में सन 1906 में हुए अधिवेशन में स्वराज्य प्राप्ति की बात कही । 

सन 1905 बंगाल विभाजन

अंग्रेजों की कूटनीति के बदौलत सन 1905 में बंगाल का विभाजन किया गया ।  उसके बाद देश की राजधानी दिल्ली बना दी गई । इसे देश मे असंतोष उभर कर सामने आया । अंग्रेजी हुकूमत ने इन आंदोलनों को कुचलने के 1909 में मार्ले मिंटो सुधारो को लागू किया गया ।

सन 1915 में महात्मा गांधी की वापसी

दक्षिण अफ्रीका में वकालत से त्याग पत्र देकर मोहन दास करमचन्द गांधी ने सन 1915 में भारत की वापसी कर ली । खेड़ा सत्याग्रह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

सन 1919 जालियांवाला बाग नरसंहार

भारत में सामाजिक सुधार एवं क्रांतिकारी गतिविधियों का बेहतर संचालन के उद्देश्य पंजाब के जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन सैकड़ो लोग एकत्रित हुए थे । जिस पर अंग्रेजी सरकार ने निहत्थे भारतीयों पर अचानक फायरिंग शुरू दी जिसे कई भारतीयों की मौत हो गई । इस नरसंहार ने भारतीयों के मन अंग्रेजी सरकार के प्रति नफरत के घाव की गहरा कर दिया ।

सन 1920 से 1922 तक असहयोग आंदोलन

अंग्रेजी सरकार के सभी कार्यों में असहयोग देने के उद्देश्य से सितंबर 1920 से महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन का आगाज़ किया गया । जो लगातार फरवरी 1922 तक चलता रहा । जिसे स्वतंत्रता सेनानियों को एक नई दिशा मिली ।

सन 1915 से 1924 तक खिलाफत आंदोलन

अंग्रेजी हुकूमत की जड़े उखाड़ फेंकने के लिए स्वतंत्रता आंदोलनों में  खिलाफत आंदोलन सबसे महत्वपूर्ण आंदोलनों में से एक था। जो 9 वर्ष में मध्य एशिया तक फैल गया था । इस आंदोलन की शरुआत सन 1915 ने  मौलाना मुहम्मद अली और मौलाना शौकत अली के नेतृत्व में हुई थी । यह एक मुस्लिम समुदाय का उपनिवेशवादियों के खिलाफ आंदोलन था । साथ ही साथ हिन्दू मुस्लिम की एकता का परिचय देते हुए सन 1924 तक चला ।

सन 1929 में सविनय अवज्ञा आंदोलन

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में चलाए जाने वाले महत्वपूर्ण आंदोलनों में से एक था । यह आंदोलन अंग्रेजी शासन व्यवस्था के खिलाफ 1929 में लाहौर अधिवेशन के बाद आगाज़ हुआ । 

इनका मुख्य उद्देश्य स्वाधीनता प्राप्त करना था । गांधी ने अपनी मांग रखते हुए 6 अप्रैल 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन का आगाज कर दिया था ।

सन 1920 में दिल्ली असेम्बली में बम धमाका

क्रूर अंग्रेजी अत्याचारों एवं शासन व्यवस्था के विरोध में स्वतंत्रता सेनानी भगतसिंह व बटुकेश्वर दत्त ने मिलकर सन 1929 में अंग्रेजी असेम्बली में बम फेक कर अंग्रेजों को नींद से जगा दिया । 

उसी दिन गिरफ्तार होकर 6 जून 1929 को अंग्रेजी कोर्ट ने दोषी करार दिया फिर 2 साल बाद 23 मार्च 1931 को फाँसी दे दी गई ।

सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन

देशभर में अंग्रेजी सरकार के जबरदस्त विरोध तो था ही मगर लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन से अंग्रेजी हुकूमत की जड़े हिल चुकी थी । रही सही कसर 1942 में शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन ने पूरी कर दी । इस आंदोलन में कई जगह पर हिंसा भी हुई थी । आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने करो या मरो का नारा दिया ।

इन हिंसा का जिम्मेदार नेतृत्व कर रहे महात्मा गांधी को ठहराया और उनके साथ कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था ।

Azadi ka amrit mahotsav essay in hindi.

सन 1943 में आजाद हिंद फौज का गठन -

स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन 21 अक्टूबर 1943 को किया गया । उनका मानना था कि सहस्त्र विद्रोह के माध्यम से अंग्रेजी शासन को चुनौती दी जा सकती है । इसलिए उन्होंने अस्थायी सेना का गठन किया जिसे विश्व के कई देशों ने मान्यता दी थी ।  जैसे जर्मनी, इटली, जापान, चीन आदि ।

इस पर प्रकार 1947 में भारत आज़ाद हो गया था । मगर भारत की आजादी से भारत का विभाजन हुआ था जिसे पाकिस्तान नाम दिया गया । आखिरकार 15 अगस्त 1947 के दिन आजादी का उत्सव मनाया गया ।


आज़ादी का महोत्सव 1947 से अब तक | Azadi ka amri mahotsav 1947 se ab tak.

सन 1947 में आज़ाद होने के बाद नव स्वतंत्र भारत के सामने कई चुनोतियाँ थी । उस दौर में सबसे बड़ी चुनौती सविधान निर्माण करना था वही दूसरी सबसे बड़ी चुनौती देशी रियासतों का एकीकरण करना था । इसी कड़ी संविधान सभा का निर्माण करने बाद 26 जनवरी 1950 को विश्व का सबसे बड़े संविधान को अंगीकार किया गया । 

स्वतंत्र भारत के सामने एक और सबसे बड़ी चुनौती देशी रियासतों का एकीकरण करना था । क्योंकि अंग्रेजों ने देशी राजाओ की स्वेच्छा पर छोड़ दिया था कि वह किस राज्य में विलीन होना चाहते है । इसी दौरान भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में देशी रियासतों का विलय भारत में किया गया । 

डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित संविधान को लागू करके देश के नागरिकों को मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य प्रदान किए । राष्ट्र को संचारु रूप से चलाने के लिए अब कई संशोधन करने पड़े । जातिय भेदभाव एवं आतंकवाद जैसे परिस्थितियों का सामना करना पड़ा । 

सीमा विवाद एक बड़ी चुनौती के रूप में रहा । कभी चीन तो कभी पाकिस्तान । उनके फन को कुचलने के लिए सन 1965 में चीन से और सन 1999 में पाकिस्तान से युद्ध लड़ना पड़ा ।

कश्मीर मुद्दा अब तक गले की फांस बना हुआ था जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर को केंद्र शासित राज्यों में शामिल करके मुद्दे को हल कर दिया । वही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य भी शुरू करवा दिया गया । 

इसी बीच भारत के विकास की गति तेजी स्व आगे बढ़ी । कुशल विदेश नीति के चलते भारत की विदेशो को साख बनी और भारत ने विदेशो में परचम लहराया । इसी प्रकार भारत अपनी चुनोतियो का सामना करते हुए आज Azadi ka Amrit Mahotsav मना रहा है । 


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